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सुप्रीम कोर्ट ने राजद्रोह कानून पर तत्काल लगाई रोक, समीक्षा होने तक दर्ज नहीं होगी नई FIR

सुप्रीम कोर्ट ने राजद्रोह कानून पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को राजद्रोह कानून की आईपीसी की धारा 124ए के तहत कोई मामला दर्ज नहीं करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने सरकार को आईपीसी की धारा 124ए के प्रावधानों पर समीक्षा की अनुमति भी दी। हालांकि, अदालत ने कहा राजद्रोह कानून की समीक्षा होने तक सरकारें धारा 124A में कोई केस दर्ज न करें और न ही इसमें कोई जांच करें।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश की 5 बड़ी बातें

1. राजद्रोह कानून पर सरकार फिर से विचार करे- सुप्रीम कोर्ट
2. सुप्रीम कोर्ट ने कहा- राजद्रोह के तहत कानून का इस्तेमाल ठीक नहीं
3. सुप्रीम कोर्ट ने कहा- जो जेल में वो अर्जी दे सकते
4. SC ने अपनी सुनवाई में कहा कि जब तक समीक्षा तब तक कार्रवाई पर रोक रहेगी
5. अदालत ने कहा कि केंद्र-राज्य सरकारें FIR से परहेज करें

राजद्रोह के तहत कानून का इस्तेमाल ठीक नहीं

उच्चतम न्यायालय ने केन्द्र और राज्यों से कहा कि वे राजद्रोह के आरोप में प्राथमिकी दर्ज करने से बचें. उच्चतम न्यायालय राजद्रोह के आरोप से संबंधित सभी लंबित मामले, अपील और कार्यवाही को स्थगित रखा जाना चाहिए। राजद्रोह मामले में उच्चतम न्यायालय ने कहा कि आरोपियों को दी गई राहत जारी रहेगी. प्रावधान की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर जुलाई में होगी सुनवाई।

जुलाई में होगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कि अगर राजद्रोह के मामले दर्ज किए जाते हैं, तो वे पक्ष राहत के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाने के लिए स्वतंत्र हैं। अदालतों को ऐसे मामलों का तेजी से निपटारा करना होगा। कोर्ट ने कहा कि आरोपी को राहत मिलना जारी रहेगा। राजद्रोह कानून के प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिका पर अगली सुनवाई जुलाई में होगी।

गौरतलब है कि बुधवार को सुनवाई के दौरान सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में केंद्र सरकार की ओर से पक्ष रखा। तुषार मेहता ने कहा कि गंभीर अपराधों को दर्ज होने से नहीं रोका जा सकता है। प्रभाव को रोकना सही दृष्टिकोण नहीं हो सकता है इसलिए, जांच के लिए एक जिम्मेदार अधिकारी होना चाहिए और उसकी संतुष्टि न्यायिक समीक्षा के अधीन है। उन्होंने आगे कहा कि राजद्रोह के मामले दर्ज करने के लिए एसपी रैंक के अधिकारी को जिम्मेदार बनाया जा सकता है।

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