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वायरल फ्लू का पता चल सकेगा अब मात्र 5 मिनट में…….

डॉ. मनीष बियानी, रिसर्च निदेशक, बियानी ग्रुप ऑफ कॉलेजेज एवं प्रोफेसर, जाइस्ट यूनिवर्सिटी, जापान

1. पेपर इम्यूनो-क्रोमेटोग्राफी स्ट्रिप क्या है?
यह एक ऐसी तकनीक है, जिससे वायरल फ्लू का पता मात्र 5 मिनट में चल जाएगा।
2. यह क्यों उपयोगी है?
स्वाइन फ्लू जैसी बीमारियों का वायरस एच1 एन 1 बॉडी में बहुत तेजी से फैलता है। ये महज 10 दिन के भीतर मरीज की जान ले लेता है ऐसे में पहले पांच दिन के भीतर यदि जांच करके इसकी पुष्टि हो जाती है तो प्रभावित व्यक्ति को बचाया जा सकता है वहीं यदि दस दिन के बाद इसकी जांच होती है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। यह वायरस इतना फैल जाता है कि प्रभावित व्यक्ति को बचाना मुश्किल हो जाता है।
3. यह स्ट्रिप कैसे काम करती है?
फ्लू वायरस के सरफेस पर दो तरह की प्रोटीन (एंटीजन) पाई जाती हैं : एच टाईप और एन टाईप। एच टाईप को हीमाग्लूटीनी व एन टाईप को न्यूरामिनीडेज कहते हैं। एच टाईप 18 प्रकार की होती है जबकि एन टाईप 11 प्रकार की। इन दोनों प्रोटीन के प्रकार पर वायरस का प्रकार निर्भर करता है। उदाहरण के लिए एच-1 एन-1 है या एच-3 एन-2। डॉ. बियानी का मानना है कि यदि इन प्रोटीन एंटीजन की एंटीबॉडीज डिस्कवर की जाएं तो किसी भी तरह के फ्लू वायरस का पता इस चिप से लगाया जा सकता है। इस तकनीक में सबसे पहले फ्लू वायरस के पर्टिकूलर टाईप के प्रोटीन एंटीजन का पता लगाया जाता है। उस विशिष्ट एंटीजन की एंटीबॉडी को डवलप किया जाता है। इसके बाद उस एंटीबॉडी को कोलाइड गोल्ड नेनोपार्टिकल तकनीक के साथ एक छोटी सी चिप पर डिपाजिट किया जाता है और जैसे ही यह पेपर चिप किसी रोगी के वायरस के सम्पर्क में आती है तो एक तरह का कलर जनरेट करती है, जो कि गोल्ड नेनोपार्टिकल से आता है और इस प्रकार कुछ ही मिनटों में किसी भी तरह के वायरस का आसानी से पता लगाया जा सकता है। इसे इस्तेमाल करना बहुत सरल है, यूं समझ सकते है कि जैसे प्रेग्रेंसी टेस्ट स्ट्रिप काम करती है। इस स्ट्रिप पर तीन केटेगरी में रिजल्ट शो होता है जब स्वाइन फ्लू संदिग्ध व्यक्ति के लार या थूक किट को टेस्ट ट्यूब के जरिए स्ट्रीप पर डाला जाता है, तो 3 से 5 मिनट में रिजल्ट मिल जाता है इसमें तीन लाइन्स बनी है- ए, बी और सी। यदि ए और बी लाइन लाल रंग की होती है तो इसका मतलब है कि संदिग्ध व्यक्ति स्वाइन फ्लू पॉजिटिव है। यहां सी लाइन हर टेस्ट के बाद लाल नजर आएगी जो, स्ट्रिप के सही काम करने की पुष्टि करती है।
4. स्वाइन फ्लू से सम्बन्धित वायरस का पता लगाने के लिए वर्तमान में कौनसी तकनीक उपयोग में ली जा रही है? पेपर चिप इससे किस प्रकार भिन्न है?
वर्तमान में इस वायरस की जांच के लिए आर टी-पीसीआर तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। जिससे जांच की रिपोर्ट आने में आधा या एक दिन लग जाता है। इसकी कीमत भी बहुत ज्यादा (2 से 5 लाख रू.) है और इस तकनीक पर आधारित मशीनें हर जगह उपलब्ध भी नहीं है। पेपर स्ट्रिप के माध्यम से इन सभी समस्याओं से निजात पाया जा सकता है। इसमें कोई मशीन या उपकरण नहीं होता, बल्कि एक छोटी सी पेपर चिप होती है, जिसे आसानी से कहीं भी ले जाया जा सकता है और उपयोग में लाया जा सकता है।

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