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कैंसर के इलाज में बेहतर साबित हो सकती है नैनो पार्टिकल्‍स टेक्नोलॉजी

दुनिया में अधिकतर व्यक्ति कैंसर से लड़ रहा है, लेकिन इसका पूर्ण रूप से इलाज अभी न तो अस्पतालों में ही मिला और न ही किसी भी संस्थान में। वैज्ञानिकों ने एक ऐसा यंत्र विकसित किया है जिसमें रक्त के नमूनों की जांच के लिए सूक्ष्म कणों का इस्तेमाल कर कैंसर का पता लगाया जा सकेगा।

चिकित्‍सा जगत का भविष्‍य नैनो पार्टिकल्‍स में छिपा हो सकता है । मीटर के अरबवें हिस्से को नैनोमीटर कहा जाता है और 1,000 नैनोमीटर से छोटे सूक्ष्म कणों को नैनो पार्टिकल्स कहते हैं। पिछली सदी के आठवें दशक में नैनो टेक्नोलाजी की अवधारणा सामने आ गई थी। तब से अब तक कई क्षेत्रों में इन सूक्ष्म कणों का प्रयोग किया जाने लगा है। पिछले कई वर्षों से चिकित्सा के क्षेत्र में इस टेक्नोलाजी के प्रयोग को लेकर कई शोध हुए हैं।

हाल में कोविड महामारी से बचाव के लिए बायोएनटेक और माडर्ना ने एमआरएनए आधारित जो टीके बनाए हैं, उनमें भी नैनो टेक्नोलाजी का प्रयोग किया गया है। अमेरिका की यूनिवर्सिटी आफ मिशिगन के प्रोफेसर डक्सिन सन ने नैनो टेक्नोलाजी की संभावनाओं पर विस्तृत जानकारी दी है। नो पार्टिकल्स से बनी दवाएं यानी नैनो मेडिसिन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। यह टेक्नोलाजी विशेषरूप से ऐसी दवाओं के मामले में बहुत कारगर है, जिनके साइड इफेक्ट ज्यादा होते हैं। नैनो टेक्नोलाजी की मदद से दवा की बहुत कम मात्र शरीर में ठीक उस जगह पहुंचाई जा सकती है, जहां उसकी जरूरत है। इससे शरीर के बाकी हिस्से उस दवा के दुष्प्रभाव से बचे रह पाते हैं।

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