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इ-लर्निंग की उपयोगिता

इन दिनों बच्चों की पढ़ाई को लेकर बड़े असमंजस की स्थिति बनी हुई है।छोटे बच्चों से लेकर कॉलेज में अध्ययन करने वाले बच्चों की पढ़ाई इस कोरोना संक्रमण काल में कैसे की जाए, यह एक बड़ा प्रश्न है? पिछले दो दशकों में हमारी शिक्षा प्रणाली विज्ञान पर आधारित हो गई थी।विज्ञान का आशय बाहरी दुनियां व पदार्थों की खोज है।विज्ञान के अध्ययन में तर्क (लॉजिक) की आवश्यकता होती है।मोबाइल, लैपटॉप, कम्प्यूटर्स, रोबोट आदि लॉजिक तर्क पर ही आधारित होते हैं। दूसरी ओर विज्ञान का आशय स्वयं को व अपने आसपास के जीवन को समझना है।आधुनिकता की दौड़ में हमारी पूरी शिक्षा व्यवस्था विज्ञान पर आधारित हो गई है और इसी कारण हमने पिछले कुछ वर्षों में नैतिक मूल्यों के पतन होते देखा व महसूस किया है।अब  यह सवाल उठता है कि हमारे जीवन को उन्नत व खुशहाल बनाने के लिए सबसे अधिक आवश्यकता ज्ञान की है अथवा विज्ञान की? अगर इसका जवाब विज्ञान है तब तो हम चाहें या न चाहें हमारी सम्पूर्ण शिक्षा व्यवस्था कोविड-19 के बाद इ-लर्निंग आधारित हो जायेगी। इसका सबसे प्रमुख कारण यह है कि तर्क (लॉजिक) को समझाने के लिए भावनाओं की आवश्यकता होती है।

अगर यह सत्य हुआ  तो हमारे समाज में शिक्षक की उपयोगित बहुत ही कम हो जायेगी।क्योंकि तर्क पर आधारित शिक्षा मशीनों द्वारा आसानी से प्रदान की जा सकेगी। वैसे भी देखिये तो हमारे देश में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए विद्यार्थी  नगण्य संख्या में अपने कॉलेजों में पहुंचते हैं।अब हमें यह तय करना होगा कि हमारी अपनी प्राथमिकताएं क्या हैं? अगर हमारी प्राथमिकता सुख सुविधा व पदार्थों की खोज है तो हम आने वाले समय में हमारी शिक्षण व्यवस्थाओं को इ-लर्निंग में बदलते हुए मूकदर्शक की तरह देखेंगे।

दूसरी ओर अगर हम जीवन मूल्य व स्वयं की खोज के रूप में ज्ञान को महत्त्व देते हैं तो फिर हमें हमारे विद्यालय व महाविद्यालय को कोरोना संक्रमण से मुक्त रखने के लिए सभी प्रयास करने होंगे।साथ ही साथ सभी नियामकसंस्थानों वविश्वविद्यालयों को अपने पाठ्यक्रमों में बदलाव करते हुए नैतिक शिक्षा पर बहुत अधिक बल देना होगा।वैसे देखा  जाए तो परमाणु बम या जैविक हथियारों के रूप में कोरोना संक्रमण मूलत: नैतिक मूल्यों की कमी के कारण ही तैयार किए गए हैं।

बियानी ग्रुप ऑफ कॉलेज़ेज शुरूआत से ही विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों के विकास के लिए प्रयासरत रहा है।अपनी आगामी योजना के तहत इ-लर्निंग प्लेटफार्म के लिए भी संस्था तैयारी कर रही है।हाल ही में संस्था द्वारा ‘भगवद्गीता… संजय की नज़र से’सर्टिफिकेट कोर्स जनसामान्य के लिए नि:शुल्क उपलब्ध कराया गया। इस पाठ्यक्रम में २४०० से अधिक विद्यार्थियों ने अपना नामांकन कॉलेज की वेबसाइट पर करवाया है।

कोई भी संक्रमण हमेशा बाहर से आता है।हमारे हाथ में एक ही चीज होती है, वह यह  है कि हम स्वयं को शारीरिक व मानसिक रूप से सक्षम बनाएं।

आशा है आप सभी अपने शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखेंगे।

प्रेम, स्नेह व सम्मान के साथ…

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