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जैन परिवार के इकलौते बेटे ने स्वामीनारायण पंथ अपनाया

अंजलि तंवर

अमेरिका में अच्छी जॉब छोड़कर गुजरात आए, दीक्षा लेकर समाज सेवा से जुड़े

सिरोही जिले के पिंडवाड़ा मूल के अमेरिका निवासी जैन परिवार के इकलौते बेटे ने संयम पथ को चुनते हुए दीक्षा ग्रहण कर ली है। दीक्षा का कार्यक्रम गुजरात के बडोदरा के पास चाणसद गांव में आयोजित हुआ। यह स्वामी नारायण संस्था के पांचवें सबसे बड़े आध्यात्मिक गुरु प्रमुख स्वामी महाराज का जन्म स्थल है। जैनम (27) ने बीएपीएस संस्था के सबसे बड़े संत महंत स्वामी महाराज के हाथों दीक्षा ग्रहण की। कार्यक्रम में देश-विदेश के 100 से ज्यादा युवाओं ने दीक्षा ग्रहण की है। जैनम ने बताया कि अब मेरा शेष जीवन आत्मकल्याण व समाज कल्याण में व्यतीत होगा।

जैनम के मन में हमेशा से देश और समाज सेवा की भावना थी

जैनम के पिता प्रीतम जैन से दैनिक भास्कर को बताया कि जैनम के मन में हमेशा से देश और समाज सेवा की भावना थी और वह पिछले काफी समय से संस्था से जुड़ा हुआ था। संस्था से जुड़कर उसने समाज के लिए काफी सेवाएं की।

मैंने सोचा था कि अगर मैं उसकी शादी कर देता हूं, तो 2 घर बस जाएंगे, लेकिन जैनम त्याग की भावना को लेकर समाज सेवा कर रहा है तो न जाने कितने घरों को फायदा मिलेगा। ऐसे में हम लोगों ने उसे सपोर्ट किया। उन्होंने कहा कि पिंडवाड़ा में ही मेरा मूल स्थान है। वहां की मिट्टी की भीनी सुगंध हमारे दिमाग और मन मस्तिष्क में हमेशा रहती है।

वह पहले पिंडवाड़ा से मुंबई गए और वहां पर व्यापार करने लगे। इसके बाद साल 1986 में न्यूयॉर्क चले गए। वहां पर खुद का इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम का हॉलसेल काम शुरू किया। जैनम जैन का परिवार हर साल अपने पैतृक शहर पिंडवाड़ा आता है। हम लोग जब भी वहां आते हैं तो मारकुंडेश्वर जी सरस्वती माता के दर्शन जरूर करते हैं।

जैनम ने न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी से हासिल की डिग्री

जैनम जैन ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा न्यूयॉर्क के हैरिक्स हाई स्कूल से की। इसके बाद न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी से कंस्ट्रक्शन मैनेजमेंट और आर्किटेक्ट की डिग्रियां हासिल कर रखी है। जैनम ने मैनहेटन में एक बड़ी कंपनी की नौकरी करते थे, लेकिन 4 साल पहले उन्होंने अचानक यह नौकरी छोड़ दी और अमेरिका से गुजरात आ गए।

यहां उन्होंने सालंगपुर में 4 साल तक बीएपीएस स्वामीनारायण गुरुकुल में शिक्षा ग्रहण की। उनको आत्म कल्याण के लिए शिक्षा महंत स्वामी महाराज ने दी है। जैनम तबला वादक भी है और डिजाइनिंग व लेखन के क्षेत्र में इनकी विशेष रुचि है।

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