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Jewels Of Rajasthan

रामावतार सिंह जाखड़

राजस्थान के झुंझुनूं जिले से संबंध रखने वाले रामावतार सिंह जाखड़ अपने समय में अंतरराष्ट्रीय स्तर के वॉलीबॉल खिलाडी रहे हैं। नवरंग सिंह जाखड़ के परिवार से संबंद्ध जाखड़ ने वॉलीबॉल खेल में अनेक राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय उपलब्धियां हासिल की हैं। बहरहाल, रामावतार सिंह ने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में बेहतरीन प्रदर्शन से भारतीय नेशनल वॉलीबॉल टीम में अपनी जगह बनाई और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में अपना व्यक्तिगत कौशल दिखाया।

”पढ़ोगे, लिखोगे तो बनोगें नवाब, खेलोगे कूदोगे, तो होओगे खराबÓÓ इस कथनी के बारे में आपकी क्या राय है?
समय बदलने के साथ-साथ लोगों की सोच भी बदली है। अब इस कथनी के ज्यादा मायने नहीं रहे। मेरे अनुसार पढऩा आवश्यक है, परन्तु प्रतिभाओं को विकसित करना भी जरूरी है। इसके लिए बड़े स्तर पर समग्र प्रयास की आवश्यकता है। आजकल खेल-कूद को शिक्षा का अनिवार्य अंग मानकर महत्व दिया जाता है। समाज में खिलाडियों को आदर-मान प्राप्त होता है। वे बच्चों के आदर्श बन गए हैं।
आपके प्रेरणास्त्रोत कौन है?
मेरे प्रेरणास्त्रोत मेरे पिताजी है। जिन्होंने हर कदम पर मेरा साथ दिया। हमेशा मुझे अपनी मर्जी से अपना भविष्य चुनने की आजादी दी। उनकी शिक्षा ही विषम परिस्थितियों में मेरा हौसला बढ़ाती है।
आपके जीवन की सबसे बड़ी चुनौती क्या रही और आपने उसका कैसे सामना किया?
जब मैंने १९८९ में वॉलीबॉल खेलना शुरू किया, तब भारत में इस खेल को ज्यादा महत्व नहीं दिया जाता था। बहुत से लोगों ने मुझे इस क्षेत्र को ना चुनने की सलाह दी, लेकिन, मैंने इसे चुनौती के रूप में लिया ओर पहले राजस्थान और फि र भारत के लिए खेलकर यह साबित किया कि कोई भी क्षेत्र छोटा या बड़ा नहीं है। जरूरत है,तो बस अपनी योग्यता को पहचानकर समर्पण और अनुशासन से अपने तय लक्ष्य को प्राप्त करने में अपनी जी जान लगाने की।
एक खिलाड़ी में सबसे महत्त्वूपर्ण बात क्या होनी चाहिए?
एक खिलाड़ी को न केवल शरीर से बल्कि मन, दिमाग और आत्मा से भी शक्तिशाली और स्वस्थ होना चाहिए। मन पर नियंत्रण, दिमाग का संतुलन और आत्मा की शुद्धता किसी भी खिलाड़ी के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण गुण होते हैंँ इसी के साथ लक्ष्य निर्धारण और उसके पाने के लिए समर्पण, त्याग, अनुशासन और लग्न ही खिलाड़ी को सफल बनाने के लिए आवश्यक हैं।
वॉलीबॉल संघ के अध्यक्ष होने के नाते भारतीय वॉलीबॉल को आप आने वाले कुछ सालों में कहां देख पा रहे हैं?
भारत में वॉलीबॉल गेम के प्रति जागरूकता और रूचि दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। खेल को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए हमारा लक्ष्य है कि 2020 ओलिंपिक में भारत वॉलीबॉल में पदक हासिल करे। इसके लिए खिलाडिय़ों को तैयार करने की कोशिश शुरू की जा चुकी है।
आप बियानी टाइम्स के पाठकों का क्या संदेश देना चाहते हैं?
मैं सभी को बस यही कहना चाहूंगा कि जो भी काम करे वो पूरी रूचि, लग्न और मन से करे। चाहे वो पढ़ाई हो, खेलकूद हो या फिर व्यवसाय बिना रूचि और मेहनत के कोई भी कार्य सफल नहीं हो सकता है और हम अच्छे से मेहनत उसी काम के लिए कर सकते हैं जिसमें हमारा मन जुड़ा हुआ हो। कोई भी क्षेत्र छोटा या बड़ा नहीं है। आवश्यकता बस अपने नजरिये को बदलने की है।

 

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