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सीमाओं से परे-करोना वायरस 

 

वायरस से देशों ने आपसी दुश्मनी भुलाया—मानवता के लिए मिलकर चलने को तैयार

चीन से फैला कोरोना वायरस अब दुनियाभर में कहर मचा रहा है। इटली, ईरान आदि जैसे देशों में कोरोना वायरस से मरने वालों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। भारत में भी कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है।तेजी से फैल रहे इस वायरस को रोकने के लिए कई राज्यों ने स्कूलों, कॉलेजों, सिनेमाघरों को बंद कर दिया है और ज्यादातर सार्वजनिक कार्यक्रम भी रद्द कर दिए गए हैं। नरेंद्र मोदी के सुझाव पर सार्क देशों की वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग हुई उसमें पाकिस्तान भी शामिल हुआ.भारत ने जबसे कश्मीर के विशेष राज्य के दर्जे को समाप्त कर दिया है तबसे भारत और पाकिस्तान के बीच किसी भी तरह का संवाद बंद है.लेकिन कोरोना वायरस एक ऐसा मुद्दा है जिस पर सार्क देशों ने अपने आपसी संबंधों को भुला दिया है.

ईरानी राष्ट्रपति हसन रुहानी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई वैश्विक नेताओं को पत्र लिखा, जिसमें COVID-19 से लड़ने के प्रयासों उन्होंने इस महामारी से निपटने के लिए ठोस रणनीति बनाने पर जोर दिया.

कई देशों के मंत्री तक संक्रमित पाये गये हैं।ग्लोबल इकॉनमी और भू-राजनीति पर सबसे ज्यादा असर रखने वाले दो रीजन यानी यूरोप और अमेरिका में इंफ्केटेड लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है।

इस संक्रमण का इलाज कब तक ढूँढा जा सकेगा और जान के नुकसान को किस हद कम किया जा सकेगा इस सवाल का जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है। लेकिन जो बात बहुत स्पष्ट है वो ये कि पहले से बुरी दशा में चल रही वैश्विक अर्थव्यस्था पर अकल्पनीय चोट पड़ने वाली है।

मीडिया दे सकारात्मक खबरों को प्रमुखता

केन्द्रीय स्वास्थय मंत्रालय के आकड़ो के अनुसार भारत में  कुल 97 मामलो मे 15 मार्च तक 13 कोरोना मरीज इस बीच ठीक होकर छुट्टी पा चुके हैं, मीडिया को इसे प्रमुखता देनी चाहिए, जिससे पैनिक कम हो सके ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) के डायरेक्टर डॉक्टर रणदीप गुलेरिया ने कहा इसके लिए अभी कोई दवाई नहीं बनी है।ऐसे में इसका कोई इलाज भी नहीं मिला है। हालांकि भारत इस वायरस को रोकने में सफल हुआ है। इसलिए भारत में यूरोप, चीन, अमेरिका की तुलना में कोरोना पीड़ितों के केस कम हैं।ऐसे में ज्यादा घबराने की बजाए ज्यादा सतर्क रहें।

दुनिया भर के सारे बडे-बड़े इवेंट स्थगित या रद्ध हो चुके हैं। भारत में प्राइवेट सेक्टर की बहुत सी कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को अगली सूचना तक घर से काम करने का निर्देश दिया है। स्कूल और मॉल अनिश्चित काल के लिए बंद करने की ख़बरें लगातार आ रही हैं।

ऐसे मे सुझाव दिया जा रहा है कि साथ ही हम सभी को कुछ यात्राएं स्थगित कर देनी चाहिए.भीड़- भाड़ वाले इलाके में जाने से बचें. इसी के साथ अगर मार्किट में जाने की जरूरत है जाएं और दिनचर्या के काम करते रहें।अपने हाथ धोते रहें। यह सबसे ज्यादा जरूरी है.

 

आनेवाले कुछ महीने विश्व राजनीति के शीर्ष पर बैठे सभी कथित और वास्तविक बड़े नेताओं की अग्निपरीक्षा के होंगे। पूरी दुनिया के राजनीतिक नेतृत्व से संजीदगी की उम्मीद है क्योंकि सवाल किसी एक बिरादरी या देश का नहीं है।वायरस राजनीतिक सीमाएं नहीं देखते हैं इसलिए सबको मिलकर काम करना होगा।

14 मार्च 2020

संजय कुमार सिंह

असिस्टेंट प्रोफेसर

पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग

 

 

 

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