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हम हमारे भाग्य के रचयिता स्वयं है

प्रसन्नता हममें पॉजिटिव एनर्जी लाती है। जो हमारे भाग्य को बदल सकती है। हम अच्छे कार्य करके अच्छा भाग्य बना सकते है। इसलिए कहा गया है -कर्मयोग आपका भाग्य बदल सकता है।
लोग कहते है कि इस सम्पूर्ण ब्रहाण्ड में दो चीजे अत्यन्त प्रभावी रूप से कार्य करती है। प्रथम भाग्य दूसरा कर्म। लेकिन आज जीवन के उस रहस्य ) को बँाटा जाना चाहिए जिससे इसमें कुछ सुधार हो सके। यह एक बहुत महत्त्वपूर्ण, शक्तिशाली व पॉजिटिव विचार है। यह आइडिया हमारी सोच जगा सकता है या हमारी सोच को बदल सकता है। अगर कोई भविष्यवक्ता हमारे लिए भविष्यवाणी करे तो क्या आप मानते है कि सच में ऐसा हो सकता है? हम बिना कुछ विचार किए आँख बंद करके उसकी बातों पर विश्वास कर लेते हैं। अगर भविष्यवक्ता सच में कुछ कर सकते थे तो अमेरिका चुनाव व पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा लिये गये निर्णय से पूर्व क्यों भविष्यवाणी नहीं कर सके?
एक बात पर गौर करें और सोचे कि हमने कल के 24 घण्टों में से 18 घंटे किस तरह बिताए- खुश रहकर या दु:खी रहकर ? क्या हम ईष्र्यालु   हुए, दु:खी हुए, क्रोधित हुए, उदास हुए, किसी के प्रति या फिर हमनें यह समय सुख, शंाति और प्रसन्नता के साथ बिताया। हमने कितने लोगों की बुराई की व उन्हें दु:खी किया ? या हमने किन-किन की तारीफ की और उनके चेहरे पर एक मुस्कान देखी ?
अगर हम अपनी इन भावनाओं को अपने कार्यो से जोड़े तो हम यह देखेंगे कि भविष्य में वह सब होने वाला है जैसा कि हम सोच रहे है और कर रहे है। अगर हम 18 घंटे दु:ख के दायरे में गुजारेंगे तो हमें मान लेना चाहिए कि हमारे साथ भविष्य में कुछ बुरा ही होगा और अगर हम अच्छा सोचेंगे तो निश्चित रूप से हमारे दिन अच्छें आएँगे।

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