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‘डांखला’ पर रीझे कविता प्रेमी, रूबरू हुए साहित्यकार मोहन आलोक

जयपुर, प्रभा खेतान फाउंडेशन द्वारा ग्रासरूट मीडिया फाउंडेशन तथा श्री सीमेंट के सहयोग से स्टेशन रोड स्थित एक होटल में आखर शृंखला के अंतर्गत शनिवार को राजस्थानी भाषा के साहित्यकार मोहन आलोक साहित्य प्रेमियों से रूबरू हुए। साहित्यकार मोहन आलोक से यह संवाद राजस्थानी भाषा के युवा साहित्यकार डॉ. हरिमोहन सारस्वत ने किया। प्रमोद शर्मा (ग्रासरूट मीडिया फाउंडेशन ) ने अधिक जानकारी देते हुए बताया कि ‘आखर’ साहित्य में योगदान देने के लिए एक कार्यक्रम शृंखला है जिसका आयोजन फरवरी 2016 से किया जा रहा है। अब इस कार्यक्रम को दो वर्ष पूर्ण हो चुके हैं। ‘आखर’ शृंखला का प्रयास है कि भाषा का प्रचार-प्रसार हो और हर संभाग के साहित्यकार को एक उपयुक्त मंच मिले। एक से दो माह के अंतराल में इस कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। इससे पूर्व दो वर्ष से निरंतर जारी ‘आखर’ कार्यक्रम में प्रतिष्ठित राजस्थानी साहित्यकारों डॉ. आईदान सिंह भाटी, डॉ. अरविन्द सिंह आशिया, रामस्वरूप किसान, अंबिका दत्त, कमला कमलेश,भंवरसिंह सामौर, डॉ. ज्योतिपुंज, डॉ. शारदा कृष्ण, डॉ. जेबा रशीद तथा देवकिशन राजपुरोहित के साथ चर्चा की गईं र्है।
कार्यक्रम के दौरान साहित्यकार मोहन आलोक ने साहित्यप्रेमियों को अपनी रचनाओं के सम्मोहन से इस तरह जोड़ा कि हर रचना पर जमकर दाद मिली। विशेष रूप से श्रोताओं ने डांखला नामक व्यंगयात्मक कविताओं की काफी सराहना की। महज 16 वर्ष की उम्र में वर्ष 1958 में मोहन आलोक की प्रथम पुस्तक ‘चेतना री चिंगारी’ का प्रकाशन हुआ। मोहन आलोक ने हिन्दी भाषा के कवि हरिवंशराय बच्चन का भी जिक्र करते हुए कहा कि कोई भी उन्हें पत्र लिखता था तो वह महज तीन दिन के अंदर ही उस पत्र का जवाब लिखते थे, मोहन आलोक की रचनाओं पर भी बच्चन टिप्पणी कर वापस भेजते हुए मात्राओं की गलती तक को भी इंगित करते थे। मुलाकात के शुरूआती दौर में मोहन आलोक की रचनाओं को पढऩे के बाद हरिवंशराय बच्चन ने कहा कि भाव अच्छे हैं, भाषा पर अधिकार नहीं, इस तरह मोहन आलोक ने अपने प्रारंभिक जीवन से जुड़ी मधुर स्मृतियों को साहित्यप्रेमियों के सामने रखा और कहा कि कवि हरिवंशराय बच्चन का उन्हें भरपूर मार्गदर्शन मिला। कार्यक्रम के अंत में साहित्यप्रेमियों को मोहन आलोक की पुस्तक उनके हस्ताक्षर के साथ भेंट की गई। कार्यक्रम में काफी संख्या में साहित्यप्रेमियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

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