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गुजरात के मयूर ने 3 साल पहले हाईटेक नर्सरी तैयार की

पूर्वा चतुर्वेदी

पिछले कुछ सालों से लोग ट्रेडिशनल फार्मिंग की बजाय मॉडर्न फार्मिंग पर जोर दे रहे हैं। इससे न सिर्फ अच्छा प्रोडक्शन हो रहा है बल्कि भरपूर कमाई भी हो रही है। गुजरात के डीसा में रहने वाले मयूर प्रजापति ने एग्रीकल्चर से ग्रेजुएशन की पढ़ाई की है। उनके पास अच्छी-खासी नौकरी का भी ऑफर था, लेकिन उन्होंने खेती करने का फैसला किया। वे पिछले 3 साल से हाईटेक नर्सरी चला रहे हैं।

जिसमें हर तरह के सीजनल प्लांट्स और सब्जियां हैं। उनके फार्म से देशभर के किसान पौधे ले जाते हैं। फिलहाल इससे वे सालाना 45 लाख रुपए की कमाई कर रहे हैं।

कैसे तैयार करते हैं बीज?

फिलहाल अभी दो तरीके से बीज तैयार कर रहे हैं। एक पॉलीहाउस के अंदर और दूसरा पॉलीहाउस के बाहर यानी खुले खेतों में। पॉलीहाउस के अंदर उन्होंने नर्सरी का सेटअप लगाया है। जहां वे मिट्टी की जगह धान की जली भूसी और नदी की रेत का इस्तेमाल करते हैं। जबकि खाद के लिए गोबर का यूज करते हैं। इन सभी को मिलाकर वे एक मिश्रण तैयार करते हैं। इसके बाद उसमें बीज लगाते हैं। सिंचाई के लिए उन्होंने ड्रिप इरिगेशन की व्यवस्था की है। 30 से 40 दिन के भीतर ये पौधे तैयार हो जाते हैं। इसमें वे कुकुरबीट्स वैराइटी की सब्जियों के बीज उगाते हैं।

इसके अलावा वे अपने खेतों में भी बीज तैयार करते हैं। उसके लिए पहले वे लंबी और पतली क्यारियां बना देते हैं। उसके ऊपर गोबर की खाद, धान की जली हुई भूसी और नदी की रेत मिला देते हैं। इसके बाद उसमें बीज की रोपाई कर देते हैं। सिंचाई के लिए उन्होंने स्प्रिंकलर लगा रखे हैं। इससे पानी वेस्ट नहीं होता है। इसमें आलू, टमाटर, प्याज जैसी सब्जियों के बीज वे तैयार करते हैं। इस प्रोसेस में बार-बार सिंचाई की जरूरत नहीं होती है।

जब प्लांट्स की संख्या बढ़ी तो नर्सरी का ख्याल आया

मयूर कहते हैं कि मेरी तकनीक नई थी। आसपास के किसान उससे प्रभावित थे। मेरा प्रोडक्शन भी उनसे ज्यादा हो रहा था। इसलिए कुछ किसान मुझसे प्लांट और बीज की डिमांड करने लगे। तब मुझे रियलाइज हुआ कि नर्सरी का काम भी शुरू किया जा सकता है। इसके बाद मैंने गांव के किसानों को बीज देना शुरू कर दिया। इससे हमारी अच्छी-खासी कमाई होने लगी। फिर मैंने खेती का भी दायरा बढ़ा दिया, एक के बाद एक नई फसलें शामिल करता गया। इतना ही नहीं, फसलों की देखभाल के लिए मैंने ऑर्गेनिक तकनीक का भी सहारा लिया। इसका फायदा भी हुआ और कुछ ही दिनों बाद हमारी नर्सरी डेवलप हो गई।

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