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संयुक्त राष्ट्र में बहुभाषावाद पर प्रस्ताव हुआ पारित, पहली बार हिंदी अपनाने का जिक्र

संयुक्त राष्ट्र महासभा की ओर से बहुभाषावाद पर भारत के प्रस्ताव को पारित किया गया है। संयुक्त राष्ट्र ने अपनी भाषाओं में हिंदी को शामिल कर लिया है। प्रस्ताव में संयुक्त राष्ट्र के कामकाज में हिंदी व अन्य भाषाओं को भी बढ़ावा देने का पहली बार जिक्र किया गया है। भारत ने इस बात पर जोर दिया कि यह आवश्यक है कि संयुक्त राष्ट्र सच्ची भावना से बहुभाषावाद को अंगीकार करे। अंडोरा की तरफ से 193 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया जिसका भारत समेत 80 से अधिक देशों ने अनुमोदन किया। प्रस्ताव में ‘‘बहुभाषावाद को संयुक्त राष्ट्र सचिवालय की गतिविधियों में न्यायसंगत आधार पर शामिल करने’’ की दिशा में उसकी जिम्मेदारी को रेखांकित किया गया है।

प्रस्ताव छह आधिकारिक भाषाओं-अरबी, चाइनीज, अंग्रेजी, फ्रेंच, रशियन और स्पेनिश के अलावा संयुक्त राष्ट्र के अनाधिकारिक भाषाओं के उपयोग के प्रयासों को रेखांकित करता है। विशिष्ट स्थानीय लक्षित श्रोताओं के साथ संवाद के लिए उचित होने पर इन भाषाओं के उपयोग की बात का प्रस्ताव है।

क्या है संयुक्त राष्ट्र का बहुभाषावाद प्रस्ताव
एक फरवरी, 1946 को पहले सत्र में UNSC ने एक प्रस्ताव पास किया था। प्रस्ताव 13(1) के तहत यूएन ने कहा था, संयुक्त राष्ट्र अपने उद्देश्यों को तब तक प्राप्त नहीं कर सकता जब तक दुनिया के लोगों को इसके उद्देश्यों और एक्टिविटीज के बारे में पूरी जानकारी नहीं हो। बहुभाषावाद पर भारत कई वर्षों से यूएन में हिंदी को मान्यता दिलाने का प्रयास कर रहा है। इसी क्रम में भारत की ओर से एक प्रस्ताव पेश किया गया था। इसके पेश करते हुए संयुक्त राष्ट्र के कामकाज में हिंदी व अन्य भाषाओं को भी बढ़ावा देने का पहली बार जिक्र किया गया है। शुक्रवार को पारित प्रस्ताव में कहा गया है कि संयुक्त राष्ट्र हिंदी भाषा सहित आधिकारिक और गैर-आधिकारिक भाषाओं में महत्वपूर्ण संचार और संदेशों का प्रसार जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करता है। इस साल पहली बार प्रस्ताव में हिंदी भाषा का उल्लेख है। इस संकल्प में पहली बार बांग्ला और उर्दू का भी उल्लेख है।

क्या है ‘हिंदी @ यूएन’
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने बताया कि यूएन में हिंदी को बढ़ावा के लिए 2018 में ‘हिंदी @ यूएन’ परियोजना आरंभ की गई थी। इसका उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र की सार्वजनिक सूचनाएं हिंदी में देने को बढ़ावा देना और दुनियाभर के करोड़ों हिंदी भाषी लोगों के बीच वैश्विक मुद्दों के बारे में अधिक जागरूकता लाना है। मिशन के तहत भारत 2018 से यूएन के वैश्विक संचार विभाग (डीजीसी) के साथ साझेदारी कर रहा है। यूएन के समाचार और मल्टीमीडिया सामग्री को हिंदी में प्रसारित करने व मुख्यधारा में लाने के लिए अतिरिक्त राशि दे रहा है।

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