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हरी, वरी, करी है हर रोग का कारण

डॉ. विजय यादव, ऑनकॉलोजिस्ट सर्जन, मणिपाल हॉस्पिटल, जयपुर

साक्षात्कारकत्र्ता : प्रियंका चतुर्वेदी, असि. प्रोफेसर, बियानी गल्र्स कॉलेज, जयपुर

कैंसर, यह शब्द सुनते ही उन लोगों की रग-रग थर्राने लगती हैं, जो स्वास्थ्य को लेकर जागरूक हैं या उसके मामले में थोड़े भी सयाने हैं। लेकिन, क्या कैंसर सचमुच उतना खतरनाक है, जितना उसे समझा जाता है? या मेडिकल साइंस के विकास ने इस बिमारी के ईलाज की भी संभावनाएं ढूंढ़ ली हैं? कुछ ऐसे ही प्रश्नों के साथ बियानी टाइम्स के इस अंक में प्रस्तुत प्रसिद्ध आन्कोलोजिस्ट सर्जन डॉ. विजय यादव से की गई बातचीत के अंश…

आम भाषा में कैंसर को किस प्रकार परिभाषित करेंगे?

हमारा शरीर कई प्रकार की कोशिकाओं से बना होता है। जैसे-जैसे शरीर को इनकी जरूरत होती है,वैसे-वैसे ये कोशिकाएं नियंत्रित रूप से विभाजित और बढ़ती रहती हैं। लेकिन, कई बार ऐसा होता है कि शरीर को इन कोशिकाओं की कोई जरूरत नहीं होती हैं, फि र भी इनका बढऩा जारी रहता है। कोशिकाओं का यह असामान्य विकार कैंसर कहलाता है। जैसे-जैसे कैंसर कोशिकाएं बढ़ती हैं और कई गुणा होती हैं, तो वे कैंसर कोशिकाओं के एक समूह का रूप ले लेती हैं, जो ट्यूमर कहलाता है। ये ट्यूमर कैंसरस या नॉन कैं सरस यानी बिनाइन हो सकता है।

कैंसर कितने प्रकार के होते हैं?

कैंसर कई प्रकार के होते हैं, जैसे सर्वाइकल कैंसर, ओरल कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर, ओवेरियन कैंसर, लंग कैंसर, पेट का कैंसर, बोन कैंसर और ब्लड कैंसर आदि।

कैंसर हो जाने के बाद उसका ईलाज कैसे किया जाए, उससे अच्छा उन कारणों के बारे में जानकारी रखना व जागरूक रहना फ ायदेमंद है, जिसके कारण कैंसर फ ैलता है, उन कारणों के बारे में बताएं।

बिल्कुल सही। ईलाज से बेहतर सावधानी है। ज्यादातर कैंसर अनहेल्दी लाईफ स्टाइल की वजह से होता है। जेनेटिक्स कारणों से होने वाले कैंसर 5 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होते। बाकी लगभग 95 प्रतिशत कैंसर किसी को भी हो सकते हैं, वे आनुवांशिक नहीं होते। कैंसर क ा मुख्य कारण  अनियमित खानपान जिसे मेडिकल लाईन में हरी, वरी और करी के नाम से जाना जाता है। बहुत जल्दी खाते हैं, बहुत चिंता करते हैं और तीखा तला हुआ खाते हैं। आज का हमारा लाइफ स्टाइल इन चीजों पर ही निर्भर हो गया है। हरी यानी हम जल्दी में होते हैं कि जल्दी-जल्दी खाना खाते हैं, कभी-कभी खाते ही नहीं है। उस समय शरीर में जो खराब तत्व पैदा होते हैं, वहीं डीएनए को डेमेज करते हैं और उसी से कैंसर कलेक्शन डवलप होता है।  वरी यानी हम बहुत चिंता करते हैं। चिंता के कारण व्यक्ति को धूम्रपान, सिगरेट, एल्कोहल की लत लग जाती है, जो कैंसर को प्रमुख कारण है। तीसरा करी यानी बहुत तीखा-तला खाते हैं, जो शरीर में अवांछित परिवर्तन लाने के लिए उत्तरदायी है।

कैंसर के ईलाज के लिए किन तकनीेकों का उपयोग किया जाता है?

ज्यादातर कैंसर से पीडि़त लोगों का उपचार कई थैरेपी को संयोजित करके किया जाता है। जैसे सर्जरी के साथ कीमोथैरेपी या रेडिएशन थेरेपी देना।

बियानी टाइम्स के पाठकों क ो क्या संदेश देना चाहेंगे?

बियानी टाइम्स के माध्यम से मैं लोगों को बताना चाहूंगा कि शरीर में होने वाली कोई भी गांठ या कोई भी असामान्य वृद्धि को नजरअंदाज ना करें, तुरंत डॉक्टर से सम्पर्क करें। दूसरी बात, यह कि कैंसर छूने से नहीं        फ ैलता। यह लोगों में सबसे बड़ी भ्रान्ति है कि मैं इसे छू लूंगा तो कैन्सर मेरे भी हो जाएगा। लेकिन, ऐसा नहीं होता है, इसलिए अपने सगे-सम्बन्धियों का साथ ना छोडें। उन्हें मेडिकल के साथ-साथ साइकोलोजिकल सर्पोट भी दें, ताकि एक स्वस्थ समाज का निर्माण किया जा सके।

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