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बंगाल में सरकारी नौकरियों के लिए बांग्ला भाषा का ज्ञान होना जरूरी

तानिया शर्मा

बंगाल में अब सरकारी नौकरियों के लिए स्थानीय भाषा यानी बंग्ला (Bengali) आना जरूरी होगा. पश्चिम बंगाल (West Bengal) की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने बुधवार को कहा कि राज्य सरकार की नौकरियों में भर्ती के दौरान स्थानीय लोगों और स्थानीय भाषा जानने वालों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए.

बनर्जी ने कहा कि इस प्रथा से प्रशासनिक मामलों में आसानी होगी. मुख्यमंत्री ने यहां प्रशासनिक समीक्षा बैठक के दौरान कहा, “यह मैं सभी राज्यों को कह रही हूं. पश्चिम बंगाल में, अगर कोई व्यक्ति राज्य से है, तो उसे राज्य सरकार की नौकरियों में भर्ती के दौरान प्राथमिकता मिलनी चाहिए, भले ही उसकी मातृभाषा बंगाली न हो. मुझे इससे कोई आपत्ति नहीं है.”बनर्जी ने कहा, “लेकिन उस व्यक्ति को बंगाली आनी चाहिए और वह राज्य का निवासी होना चाहिए. अगर वह अधिक भाषाएं जानता है, तो यह अच्छा है. लेकिन स्थानीय भाषा का ज्ञान होना जरूरी है.”

किन राज्यों में करेंगी विस्तार?

ममता ने कहा कि हमारे बंगाल में सब अच्छा है, लेकिन हमें बाहर आना पड़ा. हमारे आने से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी. उन्होंने कहा कि सभी क्षेत्रीय पार्टी साथ आए तो बीजेपी को जाना होगा. इस दौरान उन्होंने बीजेपी हटाओ देश बचाओ का भी नारा दिया. ममता ने कहा कि जब तक जिंदा हैं, तब तक लड़ें. हम महाराष्ट्र में नहीं आ रहें हैं, जहां भी रिजनल पार्टी अच्छा काम कर रही है, वहां हम नहीं जाएंगे. अपने रिजनल साथियों का साथ देंगे.

ममता की बैठक में कौन-कौन रहे मौजूद?

मुंबई में प्रबुद्व लोगों से ममता बनर्जी की मुलाकात के दौरान कांग्रेस नेता शत्रुघ्न सिन्हा भी नजर आए. कार्यक्रम में फिल्म उद्योग से जुड़े जावेद अख्तर, महेश भट्ट, सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर, सुधींद्र कुलकर्णी और एनसीपी नेता माजिद मेनन जैसे लोग शामिल थे.

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