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UP के 3 दोस्तों ने किसानों के लिए तैयार किया मोबाइल ऐप

अंजलि तंवर

ज्यादातर किसानों को खेती के बारे में सही जानकारी नहीं होती है। मसलन खेती की मिट्टी कैसी है, उस हिसाब से किन-किन फसलों की खेती करनी चाहिए? अच्छे प्रोडक्शन के लिए क्या करना चाहिए?

फसल में बीमारी लग जाए तो उसका बचाव कैसे करें? खेती के लिए जरूरी चीजें कहां से खरीदें? फसल कटने के बाद अपना प्रोडक्ट कहां बेचें? कृषि को लेकर सरकार की कौन-कौन सी योजनाएं हैं, उनका लाभ कैसे लिया जा सकता है?

किसानों की इस परेशानी का हल निकाला है यूपी के मेरठ जिले में रहने वाले हर्षित गुप्ता ने। उन्होंने अपने दोस्तों के साथ मिलकर एक ऐसा ऑनलाइन ऐप लॉन्च किया है, जिसके जरिए किसान एक्सपर्ट के माध्यम से अपनी समस्याओं का समाधान पा सकते हैं।

खेती से जुड़े हर सवाल का जवाब हासिल कर सकते हैं। इतना ही नहीं, किसान इस ऐप की मदद से अपने प्रोडक्ट की मार्केटिंग भी कर सकते हैं। फिलहाल हर्षित के साथ देशभर के 8 लाख से ज्यादा किसान जुड़े हैं। इसको लेकर उन्हें फोर्ब्स 30 की लिस्ट में भी जगह मिल चुकी है।

बचपन से ही किसानों के लिए कुछ करना चाहते थे

29 साल के हर्षित बताते हैं कि वे फार्मर बैकग्राउंड से ताल्लुक रखते हैं। खेती में उनकी पहले से दिलचस्पी रही है। इसलिए उन्होंने एग्रीकल्चर से ही ग्रेजुएशन किया। इसके बाद IIM अहमदाबाद से साल 2014 में MBA की डिग्री हासिल की और एग्रीकल्चर रिलेटेड एक कंपनी से जुड़ गए। करीब एक साल तक वहां काम किया।

हालांकि वहां भी उनका मन कुछ खास नहीं लगा। हर्षित किसानों के लिए कुछ करना चाहते थे जिससे किसानों को इंटरनेट से जोड़ा जा सके, उन्हें एक मंच पर लाया जा सके और उनकी मुसीबतों को कम किया जा सके।

साल 2016 की शुरुआत में हर्षित ने IIM अहमदाबाद में बैचमेट रहे अपने दोस्त निशांत और तौसीफ से अपना आइडिया शेयर किया। वे दोनों भी खेती से जुड़े रहे थे, लिहाजा उन्हें यह आइडिया पसंद आया और वे हर्षित के साथ काम करने के लिए तैयार हो गए। इसके बाद तीनों ने अपनी-अपनी नौकरी छोड़ दी। अब सवाल था कि इसकी शुरुआत कैसे और कहां से की जाए? किस मॉडल पर काम किया जाए ताकि ज्यादा से ज्यादा किसान जुड़ सकें।

किसानों को उनकी भाषा में ही जानकारी दी जाए, इसलिए मध्य प्रदेश से शुरुआत की

हर्षित कहते हैं कि हम तीनों लोग यूपी से ताल्लुक रखते हैं, इसलिए तय किया कि किसी हिंदी बेल्ट से ही इसकी शुरुआत की जाए।मध्य प्रदेश के मालवा रीजन को चुना।कुछ नया और अपना आइडिया इम्प्लीमेन्ट करने से पहले हमने तय किया कि किसानों से बातचीत करेंगे। उनकी दिक्कतों को समझेंगे, उनकी जरूरतों को जानेंगे, फिर उसके मुताबिक तय करेंगे कि क्या किया जाए।

दो साल बाद शुरू किया ग्रामोफोन नाम से मोबाइल ऐप

हर्षित बताते हैं कि करीब दो साल तक किसानों के साथ काम करने के बाद हमें एक ऐप की जरूरत महसूस हुई। ताकि ज्यादा से ज्यादा किसानों तक हम पहुंच सके और दूसरे राज्यों के किसान भी हमसे जुड़ सकें।

इसके बाद हमने ग्रामोफोन नाम से एक ऐप लॉन्च किया। यह ऐप किसानों के लिए बिल्कुल मुफ्त रखा। साथ ही टोल फ्री नंबर की भी व्यवस्था की, ताकि जो किसान स्मार्टफोन यूज नहीं करते हैं, वे भी एक फोन कॉल के जरिए इससे जुड़ सकें।

इस तरह हर्षित और उनके साथियों का कारवां शुरू हुआ। धीरे-धीरे किसानों को उनके बारे में जानकारी मिलती गई और वे अपना दायरा बढ़ाते गए। 5 साल के भीतर ही उनके साथ देशभर के 8 लाख से ज्यादा किसान जुड़ गए।

इनमें से 3 लाख से ज्यादा किसानों ने ऐप डाउनलोड किए। इसके साथ ही मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में किसान उनसे ग्राउंड लेवल पर भी जुड़े हैं। इतना ही नहीं किसानों के साथ ही व्यापारी भी ऐप पर जुड़े हैं।

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