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राजस्थान की आवाज जस्टिस फॉर छाबड़ा…

महात्मा गांधी ने कहा था अगर मैं एक दिन का तानाशाह बन जाऊं तो मैं पूरे देश में जो शराब की दुकाने है उन्हें बंद करवा दूंगा वो भी बिना मुआवजा दिये और इसी सोच के साथ राजस्थान के गांधी कहे जाने वाले गुरूचरण छाबड़ा आगे आए। उन्होंने भी समाज के हित के लिए सोचा कि शराब, जिससे पूरे देश और समाज का नाश हो रहा है, उसे बंद करवाया जाये और इसी अधूरे सपने को साथ मे लेकर ही वो इस दुनिया से अलविदा हो गये। उनके इस सपने को पूरा करने का बीड़ा उठाया उनकी पुत्रवधु पूनम अंकुर छाबड़ा ने और उनकी यह मुहिम आमजन की आवाज बन चुकी है।
पूनम छाबड़ा को प्रदेश की जनता से मिलते आपार जन समर्थन का असर राज्य सरकार पर भी पड़ा है। राज्य सरकार ने दो मंत्रियों की अगुवाई में एक हाई पावर कमेटी का गठन किया है। जिसमे पूनम छाबड़ा को शामिल किया गया है। यह एक तरह से पूनम और राजस्थान की जनता के संघर्ष की जीत है। इस हाई पावर कमेटी में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री अरूण चतुर्वेदी और ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री राजेन्द्र राठौड़ के अलावा शासन सचिव और आबकारी आयुक्त को भी शामिल किया गया है। इस कमेटी की दो माह में एक बार बैठक होगी। जिसमें आमजन को शराब से होने वाली व नये सुझावों पर वार्ता कर निर्णय किये जायेंगे। इसके अलावा महीने में एक बार आबकारी आयुक्त सहित इससे जुड़े अधिकारियों के साथ भी पूनम छाबड़ा बैठक में शामिल होती है।
गौरतलब है कि प्रदेश में शराबबंदी आन्दोलन को लेकरअग्रणी भूमिका निभा रही पूनम छाबड़ा के संगठन ‘जस्टिस फॉर छाबड़ा’ को प्रदेश की जनता का अपार समर्थन मिल रहा है। वर्तमान में इस संगठन से अब तक करीब ५००० लोग जुड़ चुके है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण आमेर तहसील के गांव रोजदा में देखने को मिला, जहां हाईकोर्ट के निर्णय के बाद गांव के लोगों ने शराब ठेका हटाने के लिये मतदान किया। इस दौरान गांव की महिलाओं ने बिना डरे खुलकर मतदान किया। रोजदा में शराब ठेके के खिलाफ करीब ८८ प्रतिशत मतदान हुआ। आखिरकार सरकार को इस गांव से शराब ठेका हटाना पड़ा। इस पूरे आंदोलन में जस्टिस फॉर छाबड़ा संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्ष पूनम छाबड़ा को महिलाओं एवं पुरूषों को जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंनें पिछले डेढ़ साल में २ बार आमरण अनशन और क्रमिक अनशन किया है। इसके अलावा प्रदेश के गांव, कस्बों और शहरों में करीब १७०० सभाएं कर चुकी है। इस आन्दोलन को लेकर अब तक करीब सवा लाख कि.मी. की यात्रा कर चुकी है। प्रदेश में जहां भी शराब बंदी का लेकर आन्दोलन होता है पूनम वहां जरूरत पहुंचती है। पूनम की मेहनत का ही नतीजा है कि अब तक के प्रदेश में करीब १५० ठेके स्थानान्तरित किये गये है। यह एक प्रकार से प्रदेश की जनता विशेषकर महिलाओं के संघर्ष एवं उनके सम्मान की जीत है। स्वर्गीय छाबड़ा के छोटे बेटे अंकुर छाबड़ा भी इस आंदोलन में पत्नी पूनम का हर कदम पर साथ दे रहे हैं। इस आंदोलन का लेकर पूनम एक ऐसा चेहरा बन चुकी हंै जिनके सिर्फ नाम से शराब ठेकेदार दुकानें बंद कर भाग खड़े होते हेँ।

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