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नए जॉब ट्रेंड्स में लॉ ग्रेजुएट्स की है मांग

इन दिनों लॉ ग्रेजुएट्स की मांग चारों तरफ बढ़ती जा रही है। इस कॅरियर में संभावनाओं को तलाशने के लिए हमने इस प्रोफेशन में कार्यरत व अध्यापन करने वाले अनुभवी व्यक्तियों से साक्षात्कार किया, प्रस्तुत है उनसे की गई बातचीत के कुछ अंश :

कोई भी स्नातक छात्र या छात्रा विधि शिक्षा का विकल्प क्यों चुने?
वर्तमान में संपूर्ण विश्व में विधि शिक्षा का क्षेत्र बहुत तेज गति से बढ़ता जा रहा है क्योंकि जैसे-जैसे प्रत्येक देश और राज्य में सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक विकास का दायरा बढ़ता जा रहा है। वैसे-वैसे इन सभी व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए विधि शिक्षा की आवश्यकता बढ़ती जा रही है। आपसी वाद-विवाद कई गुणा बढ़ जाने के कारण एवं इसके त्वरित निपटारे के लिए नये-नये विशिष्ट न्यायालयों की स्थापना होती जा रही है जिसके लिए विशिष्ट विधि के ज्ञान की भी आवश्यकता बढ़ती जा रही है।
विधि की शिक्षा के लिए न्यूनतम योग्यता क्या है?
वर्तमान में विधि की शिक्षा के लिए प्रवेश दो स्तर पर दी जा रही है। प्रथम तो पंचवर्षीय विधि शिक्षा जो कि छात्र सीनियर सैकण्डरी 50 प्रतिशत से उत्तीर्ण करके विभिन्न विश्वविद्यालय द्वारा प्रवेश हेतु प्रतियोगी परीक्षा द्वारा प्रवेश प्राप्त कर सकता है तथा दूसरा विधि तीन वर्षीय अवधि का जो कि छात्र विभिन्न विश्वविद्यालय से स्नातक, स्नातकोत्तर स्तर पर 45 प्रतिशत अंकों से उत्तीर्ण कर उक्त कोर्स में प्रवेश प्राप्त कर सकता है।
समाज में वर्तमान में अधिवक्ताओं की विधि व्यवसाय में क्या संभावनाएं हैं?
कोई भी छात्र विधि की तीन वर्षीय या पांच वर्षीय डिग्री किसी भी यूजीसी द्वारा मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से उत्तीर्ण करने के बाद वह अपने व्यवसाय का चयन विभिन्न क्षेत्रों में वह कर सकता है। चाहे तो वह अधिवक्ता बन सकता है चाहे तो न्यायाधिकारी, विधि शिक्षक बन सकता है।

सकारात्मक सोच के साथ समग्र विषयों का ज्ञान भी जरूरी
जस्टिस वी एस दवे के अनुसार लॉ में अच्छे करियर बनाने के लिये स्टूडेंट्स में सकारात्मक सोच होने के साथ-साथ साइकोलॉजी, सोशियोलॉजी व अन्य विषयों का समग्र ज्ञान होना बहुत जरूरी है।                                                  जस्टिस वी.एस. दवे
पूर्व न्यायाधिपति
राजस्थान उच्च न्यायालय

लॉ के क्षेत्र में अपार संभावनाएं
जस्टिस प्रशांत अग्रवाल वरिष्ठ न्यायाधीश राजस्थान उच्च न्यायालय ने कहा कि लॉ एक ऐसा सब्जेक्ट है जो हमेशा से ही ओवरक्राउडेड रहा है पर जो विद्यार्थी अपनी व्यक्तित्व विकास पर ध्यान देते हैं और लगाातार मेहनत करते है वे इस प्रोफशन मे बहुत जल्दी अपना विशिष्ट स्थान बना लेते हैं।                                                                                                                          जस्टिस प्रशांत अग्रवाल
वरिष्ठ न्यायाधीश
राजस्थान उच्च न्यायालय

 

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