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भगत सिंह जन्म से शाहदत तक…….

कल्पना राठौड़
23 मार्च के दिन भारत के सपूतों शहीद भगत सिंह ,सुखदेव और राजगुरु ने फांसी की सज़ा को गले लगाया था । आज के दिन तीनो शहीद जवानों (भगत सिंह ,सुखदेव और राजगुरु )को श्रद्धांजलि दे कर  उन्हें नमन करता है।
 भगत सिंह जन्म से शाहदत तक….. 
भगत सिंह भारत के एक महान स्वतंत्रा सैनानी व क्रन्तिकारी थे ,इनका जनम 28 सिंतम्बर 1907 मे बंगाय मे हुआ था जो अब पाकिस्तान है। इनके पिता का नाम सरदार किशन सिंह संधू और माता का नाम विद्यावती कौर था। भगत सिंह चंद्रशेकर आज़ाद व पार्टी के अन्य मेम्बर के साथ मिलकर इन्होने भारत की स्वतंत्रता के लिए अपना बहुत योगदान दे चुके है, इन्होने ब्रिटिश सरकार के जम कर मुक़ाबा किया था। 8 अप्रैल 1929 भगत सिंह ने बटुकेश्वर दत्त के साथ मिलकर के साथ मिलकर केंद्रीय असेंबली मे बम फेंके परन्तु बम फेंकने का मकसद किसी को मरना नहीं था बल्कि ब्रिटिश हुकूमत द्वारा लागु किये गए बिल ,पब्लिक सेफ्टी बिल और ट्रेड डिस्प्यूट बिल ,का विरोद करना था। बेम फेंकने के बाद यह भागे नहीं और मोके पैर ब्रीटश सरकार ने उन्हें गिरफ्तार क्र के फांसी की सज़ा दी जो उन्होंने ख़ुशी ख़ुशी गले लगा लिया और वीर गति हासिल की ।
 फांसी की वजह –
 भगत सिंह एव बटुकेश्वर दत्त ने 1929 मे 8 अप्रैल को सेंट्रल असेंबली मे बम फेंके थे। बम फेंकने के बाद वही पर दोनों क्रांतिकारियों ने भागने के बजाए अपनी गिरफ्दारी दी थी , जिसके नतीजे स्वयरूप उन्हें ब्रिटिश सरकार ने उन्हें बंधी बना लिया था और वीरो को लाहौर सेंट्रल जेल में करीब २साल तक रहने के बाद भगत सिंह ,राजगुरु और सुखदेव को फांसी दी गयी थी। फांसी के समय तीनो वीरो ने ख़ुशी – ख़ुशी अपनी मातृभूमि की आजादी के लिए वीरगति को प्राप्त हो गये , फांसी के समय तीनो क्रन्तिकारीयो ने देशभक्ति का गीत गा कर फांसी को झूल गए। तभी से देशभर 23 मार्च को तीनो स्वतंत्रा सेनानी के इस बलिदान को याद में शहीद दिवस मनाया जाता है।
शहीद दिवस हमे हर साल हमे भगत सिंह और उनके साथियो के युवा अवस्था के जोश ,उत्साह और देश के प्रति प्रेम की याद दिलाता है। शहीद दिवस हर एक देशप्रेमी युवा की प्रेरणा है।

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