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स्किल एजुकेशन आज की सबसे बड़ी आवश्यकता : Dr. lalit K. Panwar

एक ऐसी शख्सियत जिन्होंने एडमिनिस्ट्रेशन में बहुत काम किया और अब एजुकेशन के क्षेत्र में कार्य करने की सोच रखते हैं। राजस्थान में हाल ही में बनी स्किल यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉ. ललित के. पंवार आरपीएससी के चैयरमेन रह चुके हैं और उन्होंने अपनी आईएएस की सर्विस के दौरान कई महत्त्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। डॉ. पंवार १० जुलाई २०१७ को राजस्थान लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष पद से सेवानिवृत्त हुए थे। सन् १९७९ बैच के आईएएस अधिकारी डॉ. पंवार आईटीडीसी, आरटीडीसी के अध्यक्ष,, राज्य व भारत सरकार में पर्यटन सचिव सहित अनेक विभागों के प्रमुख रहे हैं। लंबे समय तक निदेशक माध्यमिक शिक्षा के रूप में अभूतपूर्व काम किया। डीपीआर के अतिरिक्त साढ़े तीन साल तक कलेक्टर जैसलमेर रहे। संभागीय आयुक्त जोधपुर भी रहे। बाड़मेर जिले के छोटे से गांव के रहने वाले डॉ. पंवार पर्यटन में पीएचडी है और इन्होंने दुनिया के अधिकतर देशों में राजस्थान व भारत का पर्यटन पहुंचाया है।

स्किल एजुकेशन आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है, आप पिछले बहुत समय से स्किल डवलपमेंट एजुकेशन से जुड़े हुए हैं, आपकी इस बारे में क्या राय है और भारत सरकार का इस बारे में क्या दृष्टिकोण है?
भारत सरकार ने एक अलग से मंत्रालय बनाया है (मिनिस्ट्री ऑफ स्किल डवलपमेंट एण्ड एंटरप्रेन्योर डवलपमेंट)। भारत सरकार और राज्य सरकार स्किल डवलपमेंट को उच्च प्राथमिकता दे रही है। १२०० करोड़ का सालाना बजट इसके लिए रखा गया है। आंकड़ों की मानें तो ३०००० बच्चे प्रतिदिन हमारे वर्कफोर्स से जुड़ रहे हैं। हमें ३०००० जॉब प्रतिदिन क्रिएट करनी पड़ेगी। अभी हम मुश्किल से 500 जॉब क्रिएट कर पा रहे हैं। इस गेप को कम करना ही हमारे लिए चुनौती है। राजस्थान भारत में पहला राज्य है, जहां सरकार ने स्किल डवलपमेंट यूनवर्सिटी बनाई गई है। हमारा लक्ष्य है कि हम इस तरह से कोर्सेज डवलप करें जिसमें बच्चे १२वीं के बाद अपनी रूचि के अनुसार स्किल डवलपमेंट से जुड़ सकें ताकि जब वे जॉब मार्केट में आयें तो उन्हें प्लेसमेंट मिल सके। इसके लिए हमने डिग्री और डिप्लोमा कोर्सेज शुरू किये जायेंगे। हमारे हर कोर्स का ६० प्रतिशत भाग प्रेक्टिकल ट्रेनिंग पर आधारित होगा। इससे उन्हें पढ़ाई खत्म करते ही जॉब मिलने की संभावनाएं बढ़ जाएंगी।
आप मदरसों में स्किल डवलपमेंट करने की पहल करना चाहते हैं। मदरसों में यह प्रोग्राम कितना व्यवहारिक सिद्ध हो पायेगा?
मदरसों में स्किल डवलपमेंट का काम शुरू कर दिया गया है। कई मदरसों मे हमने मिनी आईटीआई बनाई है। मदरसों में धार्मिक तालीम दी जाती है, जिसमे उन्हें धर्म के बारे में बताया जाता है। धर्म के साथ-साथ बुनियादी तालीम भी दी जानी जरूरी है। भगवान की आराधना अपनी जगह है, साथ ही साथ काम अपनी जगह है। हम ये कह सकते हैं कि मंदिर, मस्जिद, गुरूद्वारे,चर्च इन सभी धर्मो को कर्म से जोड़ा जाना जरूरी है, क्योंकि धर्म के साथ-साथ कर्म जुड़ जाने पर आप इंसानियत के तौर पर कामयाब होगें और बुनियादी तौर पर भी आपको सफ लता मिलेगी।
राजस्थान में गल्र्स एजूकेशन की जरूरत के बारे में आपकी क्या राय है?
गल्र्स एजूकेशन की आवश्यकता राजस्थान को ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को है। धर्म भी यह कहता है कि मातृशक्ति के शिक्षित होने पर पूरा समाज शिक्षित हो सकता है। ये देश के विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण बात है, क्योंकि शिक्षा ही विकास की पहली सीढ़ी है।
बियानी टाइम्स के पाठकों को आप क्या संदेश देना चाहेंगे?
मैं शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े हर व्यक्ति से कहना चाहुंगा कि हर क्षेत्र में स्किल डवलपमेंट की अपार संभावनाएं हैं। इसलिए हर कोर्स को प्रशिक्षण कार्यक्रमों को जोडऩा चाहिए। स्किल को डवलप करने की जरूरत है और हार्ड स्किल के साथ-साथ सॉफ्ट स्किल विकसित करने की भी आवश्यकता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का विजन है कि भारत दुनिया का स्किल कैपिटल बनें।

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