Positive News: सिर्फ 6 महीने में दवा से पूरी तरह ठीक हुआ कैंसर,100 फीसदी कारगर साबित
Positive News: सिर्फ 6 महीने में दवा से पूरी तरह ठीक हुआ कैंसर,100 फीसदी कारगर साबित

Positive News: सिर्फ 6 महीने में दवा से पूरी तरह ठीक हुआ कैंसर,100 फीसदी कारगर साबित

कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसकी सटीक दवा आज भी विज्ञान ढूंढ़ रहा है। लेकिन रेक्टल कैंसर से जूझ रहे एक समूह के साथ एक चमत्कार हुआ है। प्रयोग के तौर एक इलाज में इन मरीजों का कैंसर पूरी तरह ठीक हो गया और इन्हें नया जीवन मिल गया। इस छोटे से क्लिनिकल ट्रायल में 18 मरीजों को शामिल किया गया था जिन्हें छह महीनों के लिए डोस्टरलिमैब नामक एक दवा दी गई। छह महीने के बाद इन सभी लोगों का कैंसर पूरी तरह ठीक हो गया।

अमेरिका में एक अध्ययन के दौरान इम्यूनोथेरेपी की नई दवा से रेक्टल कैंसर का इलाज किया गया । छह महीने के कोर्स के बाद किसी भी मरीज की जांच में ट्यूमर सामने नहीं आया। कुछ मरीजों को दो साल का समय हो चुका है और अब तक कैंसर का कोई लक्षण नहीं उभरा है। न्यूयार्क स्थित एमएसके कैंसर सेंटर के डा. लुइस ए डियाज जूनियर के नेतृत्व में हुए इस अध्ययन के नतीजे न्यू इंग्लैंड जर्नल आफ मेडिसिन में प्रकाशित किए गए हैं।

दवा ऐसे करती है काम

कैंसर कोशिकाएं स्वयं को शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) से छिपाने में सक्षम होती हैं। उनकी इसी खूबी के कारण शरीर में ट्यूमर बनता है। यह दवा कैंसर की कोशिकाओं से उस पर्दे को हटा देती हैं और हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली उन्हें आसानी से देख पाती है। इसके बाद हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली ही उन कैंसर कोशिकाओं को नष्ट कर देती है। इसीलिए इस प्रक्रिया को इम्यूनोथेरेपी कहा जाता है।

 नहीं दिखे साइड इफेक्ट
मीडिया से बात करते हुए यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया में कोलोरेक्टल कैंसर विशेषज्ञ डॉ. एलन पी. वेनुक ने कहा कि सभी मरीजों का पूरी तरह ठीक होना ‘अभूतपूर्व’ है। उन्होंने इस रिसर्च को विश्वस्तरीय बताया है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि यह खासतौर पर प्रभावशाली इसलिए है क्योंकि किसी भी मरीज में ट्रायल ड्रग के साइड इफेक्ट नहीं देखे गए। रिसर्च पेपर की को-ऑर्थर ने उस पल के बारे में बताया कि जब रोगियों को पता चला कि उनका कैंसर पूरी तरह से ठीक हो चुका है। न्यूयॉर्क टाइम्स से उन्होंने कहा, ‘उन सभी की आंखों में खुशी के आंसू थे।’

 उम्मीद जगी
ट्रायल के दौरान मरीजों को छह महीने तक हर तीसरे हफ्ते दवा दी गई। वे सभी कैंसर के एकसमान स्टेज पर थे। यह उनके रेक्टम में फैल गया था लेकिन इसने दूसरे अंगों को प्रभावित नहीं किया था। दवा का रिव्यू करने वाले कैंसर शोधकर्ताओं ने बताया कि यह इलाज आशाजनक लग रहा है। लेकिन इसके बड़े पैमाने पर ट्रायल की जरूरत है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि दवा बाकी मरीजों पर भी असरदार है और यह कैंसर को वास्तव में पूरी तरह ठीक कर सकती है।

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