कैंसर मरीजों को मिलने वाली है राहत
कैंसर मरीजों को मिलने वाली है राहत

कैंसर मरीजों को मिलने वाली है राहत

राधिका अग्रवाल

स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट (एससीआई) में जल्दी ही लीनियर एक्सीलेरेटर मशीन लगेगी और इसके लिए सभी तरह की एप्रुवल मिल चुकी है। अगले छह महीने के भीतर यह इंस्टाल कर दी जाएगी और हर दिन 20 से अधिक मरीजों को इलाज दिया जा सकेगा। एससीआई में दुनिया की बेस्ट लीनियर एक्सीलेरेटर मशीन आएगी, जिसकी कीमत 54 करोड़ से अधिक होगी। पीपीपी के तहत चलाई जाने वाली इस मशीन का 45 प्रतिशत रेवेन्यू सरकार के पास आएगा। ऐसे में न केवल मरीजों को बड़ा फायदा होगा, बल्कि रेवेन्यू शेयरिंग से आने वाले दिनों में अन्य प्रोजेक्ट में मदद मिलेगी।

लीनियर एक्सीलेरेटर से सीधे कैंसर ट्यूमर वाले हिस्से पर रेडिएशन डाला जाता है, जो दूसरी कोशिकाओं (स्वस्थ) को खत्म करने के बजाय केवल कैंसर कोशिकाओं को ही खत्म करेगा। इसमें दूसरी मशीनों के मुकाबले ज्यादा रेडिएशन निकलता है और इसीलिए इसे चलाने के दौरान रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट का होना जरूरी है।

तीन साल से चल रही कार्यविधि अब सफल :-

पिछले ढाई साल से इस मशीन को लाने की कार्यविधि चल रही थी, लेकिन बजट इश्यू के चलते यह नहीं आ पा रही थी। एसएमएस के पास इतना स्टाफ नहीं है कि वह आठ घंटे से अधिक समय मशीन को चला सके। ऐसे में पीपीपी के माध्यम से इस मशीन का 15 घंटे से अधिक समय चलाया जा सकेगा और 20 से अधिक मरीजों को थैरेपी दी जा सकेगी, वहीं मशीन में किसी भी तरह की खराबी होने पर तुरंत सही कराने की जिम्मेदारी कंपनी की होगी। कैंसर रोग विभाग में मशीन सेटअप के लिए कार्य शुरू हो गया है, इसके लिए सुरक्षित रेडिएशन फ्री सेंटर बनाया जा रहा है। इसके लिए बेरीकेडिंग कर दी गई है। इस मशीन की कीमत करीब 28 करोड़ रुपये है। इसे ब्रेकीथेरेपी मशीन के पास लगाया जा रहा है।

एक्सीलेरेटर मशीन की यह है खासियत :-

एसएन में अभी कोबाल्ट मशीन से कैंसर के जख्म की सिकाई हो रही है। इससे जख्म के आसपास की मांसपेशियां भी प्रभावित होती हैं। मरीज को साइड इफेक्ट भी होते हैं। लीनियर एक्सीलेरेटर मशीन से साइड इफेक्ट नहीं होते हैं। इससे सटीक जख्म की ही सिकाई होगी, आसपास की मांसपेशियाें को नुकसान नहीं पहुंचेगा। मरीजों को पीड़ा भी कम होगी।

 

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