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लोग जैसा सोचते हैं और अनुभव करते हैं समाज का निर्माण उसी अनुरूप हो जाता है।

बाहुबली व तीन तलाक का मुद्दा इस माह देश में काफी चर्चित रहा। साथ ही साथ पूनम छाबड़ा द्वारा शराब बंदी के मुद्दे पर किये गये प्रयास प्रदेश भर में काफी चर्चित रहे। आईये, इन मुद्दों पर जरा विचार करें। ये तीनों मुद्दे आज के समाज का आईना हैं और भविष्य का पूर्वानुमान है। सबसे अलग बात तो यह महसूस हुई कि हर व्यक्ति इस बात की चर्चा कर रहा था कि ‘कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा’ और यह बहुचर्चित फिल्म कुल मिलाकर १२०० करोड़ का व्यापार कर चुकी है। कहते हैं हम जो सोचते हैं, जो देखते हैं और जिसकी चर्चा करते हैं, हम वैसे ही बन रहे होते हैं। हर व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को संवेदनशीलता के साथ देखना चाहता है, जो उसकी भावनाओं को समझ सके। बाहुबलि में भाई-भाई व मां-बेटे के रिश्ते को महत्वकांक्षा के सामने गौण होते दिखाया गया है। पूरी फिल्म में शुरू से अंत तक बदले व द्वेष की भावना को बड़े भव्य सेट बनाकर आधुनिकतम तकनीक से फिल्माया गया है। शायद फिल्म के डायरेक्टर एस. एस. राजमौली को समाज के मनोभाव की समझ रही होगी और इस मनोभाव के अनुरूप फिल्म को दो भागों में बनाया गया है और वह दिखाया गया है जो हमारे मन में घर कर चुका है। इस फिल्म को देखने के बाद यह तो साबित हो ही जाता है कि सोशल मीडिया तिल का ताड़ बना सकता है। यह भी सत्य है कि ये पूरा ब्रह्माण्ड किसी एक शक्ति के अधीन है तो उस शक्ति का नाम प्रेम है, घृणा व हिंसा नहीं। मनोविज्ञान तो यह कहता है मनुष्य जैसा सोचता है और अनुभव करता है समाज का निर्माण उसी अनुरूप हो जाता है। आज के समय की सबसे बड़ी समस्या नकारात्मक सोच का बढऩा ही है।

पूनम छाबड़ा को शराबबंदी को लेकर जनता का अपार समर्थन मिला व राज्य सरकार ने दो मंत्रियों की अगुवाई मे एक हाईपावर कमेटी इसके लिए गठित कर दी है। इस हाईपावर कमेटी में दो वरिष्ठ मंत्रियों व आबकारी आयुक्त को शामिल किया गया है। मैं यहां कहना चाहूंगा कि शराब की लत से समाज और परिवार में अशान्ति नही आती, बल्कि सच तो यह है कि हमने समाज में नकारात्मकता को इतना परोस दिया है कि आदमी अशांत हो गया है और नकारात्मक व अशांत आदमी ही शराबी बन सकता है।

अगर हमें किसी पेड़ को काटना है तो पत्ते व डाली काटने से काम नहीं होगा। वास्तव में हमें जड़ों को काटना होगा। शराबबंदी की इस मुहिम में पूनम एक ऐसा चेहरा बन गई हैं, जिसके नाम से शराब ठेकेदार दुकानबंद कर भाग खड़े होते हैं। अब तक प्रदेश में १५० ठेके स्थानान्तरित किये गये है, पर सच तो यह है कि अशांत व्यक्ति इन भागे हुये लोगों को ढूंढ ही लेगा। वास्तव में अगर हम समस्या का समाधान निकालना चाहते हैं, तो हमें कुछ गहरा काम करना होगा। मनुष्य को शान्ति व आनन्द के साथ जोडऩा होगा, क्योंकि शांत और आनन्दचित्त व्यक्ति का शराब पीना लगभग असंभव है।

तीन तलाक के मुद्दे पर सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई शुरू हो चुकी है। न्यायालय द्वारा नियुक्त अलग-अलग धर्म से ताल्लुक रखने वाले ५ वरिष्ठतम जज जल्द ही अपना फैसला देने वाले हैं। मुस्लिम महिलाओं के संगठनों का मानना है कि तीन तलाक का इस्लाम के बुनियादी उसूलों या कुरान से कोई लेना-देना नहीं है, इस बात में दम है। महिलायें समाज में पॉजिटीव एनर्जी का परिचायक है। महिलाओं द्वारा गाली देना, धूम्रपान व मादक पदार्थो से जुडऩा व तलाक की पेशकश करना बहुत असामान्य घटना है, जो इस बात की पुष्टि करती है कि स्वभावत: महिलायें पॉजिटीव सोच रखती हैं। मुस्लिम महिलाओं को आज भी पुरूष प्रधान समाज नकारात्मक सोच के कारण अपने मूल अधिकारों के लिए भी लडऩा पड़ रहा है। अगर हम समाज में अहिंसा, प्रेम व भाईचारा बढ़ाना चाहते हैं, तो हमें इंसान को शांति व प्रेम से जोडऩे की खोज करनी होगी। हां… यह कहना चाहेंगे कि ये असंभव नहीं है, बल्कि काफी हद तक संभव है।

मेरा सभी पाठकों से निवेदन है कि अपने स्कूल से कॉलेज जा रहे बच्चों को उनके पसंद का पाठ्यक्रम चुनने की स्वतंत्रता दें, क्योंकि प्रसन्न व्यक्ति ही खुशी-खुशी अपनी ऊर्जा को अपने लक्ष्य प्राप्ति में उपयोग करने में सफल होता है। कॅरियर व जनरल काउंसलिंग के लिए बियानी गल्र्स कॉलेज हमेशा आपका स्वागत करता है।

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