किसी को अंदेशा नहीं था कि1918 के बाद जल्द ही दूसरा विश्वयुद्ध मुंह फै लाए खड़ा होगा। सिर्फ एक व्यक्ति के जुनुन और दुनिया से बदला लेने की मानसिकता ने २०-२२ साल के बाद ही दुनिया को दूसरे विश्व युद्ध की त्रासदी में झौंक दिया, वह व्यक्ति था, हिटलर, जो जिद्दी, अंहकारी और जुनूनी था।
इसी तरह वर्तमान दौर में दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध की आहट को साफ सुन पा रही है। इसका भी सिर्फ एक ही कारण है, सिर्फ एक व्यक्ति के पास असीम शक्ति का होना, दूसरा उस व्यक्ति का जिद्दी, अंहकारी और कू्र्र र होना।उस व्यक्ति का नाम है-नार्थ कोरिया का शासक किम जोंग, जो परमाणु शक्ति के बल पर अमेरिका तक को झुकाने में लगा है। जिस व्यक्ति के पास खोने के लिए कुछ भी नहीं होता, वह अपनी इच्छा के लिये किसी भी हद तक जा सकता है। समझदार लोग इसी प्रवृत्ति से बचते है। ऐसा ही नॉर्थ कोरिया के साथ हो रहा है। कुछ माह पूर्व उसने हाइड्रोजन बम का परीक्षण कर यह साबित भी कर दिया।
पाकिस्तान के परमाणु बमों के जनक डॉ. अब्दुल कादिर खान ने थोड़े से लालच के कारण उत्तरी कोरिया को उस समय जो परमाणु तकनीक बेची, उसका खामियाजा आज सारा विश्व भुगत रहा है। आज अपनी जिद्द और जुनून के बल पर उत्तर कोरिया ने २५०-३०० बमों का जखिरा अर्जित कर लिया, जो विश्व में तबाही लाने के लिए पर्याप्त है।
जहां किम ने अपने देश के विकास को दरकिनार करके सिर्फ परमाणु हथियार इकट्ठा करने में अपना धन व समय लगाया उससे सभी देश आतंकित हैं। आज दक्षिण कोरिया, जापान, रूस और प्रमुख रूप से अमेरिका धैर्य की पराकाष्ठा के मुहाने पर खड़े हैं। सभी जगह से लगभग तैयारी पूरी है, बस पहले गलती कौन करता है, यह देखना है।
किम जोंग बार-बार दुनिया को उकसाने वाले परीक्षण ही रहा है और उस क्रूर शासक को दुनिया में समझाने वाला कोई नहीं है। अब देखना यह है कि बाकी देश कब तक उसे माफ करते है। जब तक किम जोंग का अंत नही होता है, यह डर दुनिया पर हमेशा बना रहेगा। ईश्वर उसे सद्बुद्धि दें।
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