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स्वीडन में 26 साल की क्लाइमेट मिनिस्टर - Biyani Times
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स्वीडन में 26 साल की क्लाइमेट मिनिस्टर
स्वीडन में 26 साल की क्लाइमेट मिनिस्टर

स्वीडन में 26 साल की क्लाइमेट मिनिस्टर

तानिया शर्मा

स्वीडन की नई गठबंधन सरकार में 26 साल की नेता रोमिना पोरमोतरी को क्लाइमेट मिनिस्टर बनाया गया है। रोमिना को पर्यावरण जैसा अहम मंत्रालय सौंपे जाने की काफी चर्चा हो रही है। क्लाइमेट चेंज के खिलाफ आवाज उठाने वाली ग्रेटा थनबर्ग भी स्वीडन की ही नागरिक हैं।

नए प्राइम मिनिस्टर उल्फ किस्टर्सन ने मंगलवार को कैबिनेट नॉमिनेशन्स का ऐलान किया। स्वीडन के हालिया चुनाव में राइट विंग कोएलिशन ने जीत हासिल की है। रोमिना इसके पहले पार्टी की यूथ विंग की चीफ रह चुकी हैं।

लिबरल पार्टी की सदस्य

  • स्वीडिश मीडिया के मुताबिक, रोमिना कई साल पहले ही लिबरल पार्टी की यूथ विंग से जुड़ गईं थीं। लेकिन, नई सरकार में उनको क्लाइमेट मिनिस्टर बनाया जाना कुछ लोगों को हजम नहीं हो रहा है। इसकी वजह यह है कि रोमिना ने कभी इस मुद्दे पर काम नहीं किया। इतना ही नहीं, उनके पर्सनल या प्रोफेश्नल प्रोफाइल में भी क्लाइमेट से जुड़े मुद्दों का जिक्र नहीं है।
  • इसके अलावा एक और रोचक तथ्य ये है कि रोमिना किसी वक्त प्रधानमंत्री किस्टर्सन की बड़ी आलोचक रही हैं। प्रधानमंत्री स्वीडन डेमोक्रेट्स पार्टी से हैं। उन्होंने कुछ वक्त पहले तक डेमोक्रेट्स पार्टी से गठबंधन का विरोध किया था।
  • महज दो साल पहले रोमिना ने सोशल मीडिया पर लिखा था- डेमोक्रेट पार्टी तो किस्टर्सन के बगैर चल सकती है। लेकिन, अगर वो उस पार्टी में आते हैं तो हमें गठबंधन से दूर रहना चाहिए।

मूल रूप से ईरानी हैं रोमिना

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रोमिना मूल रूप से ईरान की नागरिक हैं। हालांकि, उनका जन्म स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में ही हुआ। इसके पहले भी स्वीडन में यंग मिनिस्टर रह चुके हैं, जिनकी उम्र 30 साल से कम थी।

क्लाइमेट एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग भी स्वीडन की ही रहने वाली हैं। उन्होंने क्लाइमेट चेंज के खिलाफ लाखों युवाओं को एकजुट किया और दुनिया के बड़े नेताओं के सामने इस मुद्दे को उठाया।

क्राइम रेट ज्यादा

शुक्रवार को जब स्वीडन की गठबंधन सरकार का ऐलान हुआ तो प्रधानमंत्री किस्टर्सन ने सहयोगियों के साथ हुए समझौते को भी सार्वजनिक कर दिया। उन्होंने इमीग्रेशन के खिलाफ सख्त रुख अपनाने का वादा किया। इसके साथ ही क्राइम पर सख्ती से रोक लगाने की बात कही।

स्वीडन के इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है कि एक नई पोस्ट अप्रूव की गई है। प्रधानमंत्री के मुताबिक, देश में इमीग्रेंट्स की वजह से क्राइम रेट बढ़ा है। इसके लिए सिविल डिफेंस मिनिस्ट्री बनाई गई है। हालांकि, इसकी एक वजह रूस से जारी तनाव भी है।

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