एक दिन की जिला कलेक्टर बनी 11 वर्षीय फ्लोरा असोदिया
एक दिन की जिला कलेक्टर बनी 11 वर्षीय फ्लोरा असोदिया

एक दिन की जिला कलेक्टर बनी 11 वर्षीय फ्लोरा असोदिया

तानिया शर्मा

गुजरात के अहमदाबाद में  शनिवार को  एक दिन के लिए फ्लोरा असोदिया को जिला कलेक्टर का कार्यभार सौंपा गया। दरअसल, 11 वर्षीय फ्लोरा IAS आफिसर ओर जिला कलेक्टर बनना चाहती है और उसकी इस ख्वाहिश को अहमदाबाद के कलेक्टर ने पूरा किया। उन्होंने अपनी कुर्सी एक दिन के लिए फ्लोरा को सौंप दिया। पिछले कई महीनों से फ्लोरा ब्रेन ट्यूमर से जूझ रही है। उसकी मां सोनल बेन असोदिया ने बताया, ‘मेरी बेटी 7वीं में पढ़ती है और कलेक्टर बनना चाहती है। लेकिन पिछले कुछ दिनों से उसकी तबियत ठीक नहीं है और हमें इस बात का डर है कि वह अपना यह सपना कभी पूरा नहीं कर पाएगी। आज वह एक दिन के लिए कलेक्टर बनी और हम इसे लेकर काफी खुश हैं।’

केक खिलाया, माला पहनाईं

सांगले बोले, “हम फ्लोरा के माता-पिता को राजी किया और हम उन्हें मनाने में सफल रहे। जब फ्लोरा से मिले तो वो खुश नजर आई। उसके सिर पर बाल नहीं बचे,क्योंकि सर्जरी हुई है।” उन्होंने कहा कि, “अब मैं प्रार्थना करता हूं कि फ्यूचर में यह कलेक्टर ही बने।”

मां ने जाहिर किया डर

वहीं, फ्लोरा की मां सोनल बेन असोदिया भी मीडिया से रूबरू हुईं। सोनल बेन ने बताया, ‘मेरी बेटी 7वीं में पढ़ती है और कलेक्टर बनना चाहती है। मगर..वो पिछले कुछ समय से बीमारी से जूझ रही थी। अभी उसकी तबियत ज्यादा ठीक नहीं है..तो हमें इस बात का डर है कि वह अपना सपना पूरा कर पाएगी या नहीं। अहमदाबाद के िजला कलेक्टर साहब ने उसकी इच्छा पूरी की..वो एक दिन के लिए कलेक्टर की कुर्सी पर बैठी। उसका स्वागत किया गया। इससे खुशी मिली।”

कलेक्टर संदीप सांगले ने की प्रार्थना

कलेक्टर संदीप सांगले बोले, “मैंने ईश्वर से प्रार्थना की है कि फ्लोरा स्वस्थ हो और बड़ी होकर वो कलेक्टर ही बने।” फ्लोरा की कैंसर से जुड़ी सर्जरी के बारे में बात करते हुए अहमदाबाद के कलेक्टर संदीप सांगले ने कहा, अगस्त में उसकी सर्जरी हुई थी। वो हॉस्पिटल में थी। तब हमें मेक-ए-विश फाउंडेशन से एक संदेश मिला कि फ्लोरा कलेक्टर बनना चाहती है। जिसके बाद हमने फ्लोरा के माता-पिता से उसे एक दिन के लिए कलेक्टर बनाने के लिए संपर्क किया। हालांकि, उसके माता-पिता अनिच्छुक थे। माता-पिता ने कहा था कि, सर्जरी के बाद फ्लोरा की हालत बिगड़ी थी और उसे हॉस्पिटल में डॉक्टरों की देख-रेख में रहना था।”

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