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चर्म रोग: बचाव और इलाज

डॉ. भगवान दास (एम.बी.बी.एस.,एम.डी.) चर्म, रति एवं कुष्ठ रोग विशेषज्ञ, शास्त्री नगर, जयपुर

प्र.1. सर्दियों में त्वचा रूखी हो जाने से बहुत समस्या होती है ऐसे में बचाव हेतु त्वचा के लिए, कैसे ख्याल रखें?
उतर. सर्दियों में त्वचा रूखी हो जाती है तो ऐसे में हमें बाहरी हवा से त्वचा के बचाव के लिए मॉश्च्युराइजर का प्रयोग जैसे एलोवीरा, वेसलीन, कोकोनट ऑयल का प्रयोग करें। कुछ लोगों में रूखापन ज्यादा होना, जन्मजात बीमारी, ज्यादा रूखेपन से स्कीन का फटना तो ऐसी त्वचा की ज्यादा केयर करने की जरूरत होती है। काफी उम्र दराज लोगों में रूखापन ज्यादा, सर्दियों में त्वचा में परिवर्तन ज्यादा होता है ऐसे व्यक्तियों को इंटैन्स, गिलसरीन का प्रयोग करना चाहिए। त्वचा को रूखेपन से बचाने हेतु हमें ज्यादा कैमिकल वाले, हार्स सोप का प्रयोग नही करना चाहिए। मुख्यतयाः सर्दियों में ऊनी कपडों का प्रयोग करने से पहलें सूती वस्त्र पहनें जिससे त्वचा में नमी बनी रहे, त्वचा रूखी न हो इसके साथ लूप वाटर (न ज्यादा गर्म न ज्यादा ठण्डा) का प्रयोग करें जिससे बालों में रूसी की प्रॉब्लम न हो जिससे त्वचा की सुरक्षा हो।

प्र.2. प्रदूषण से त्वचा बहुत प्रभावित होती है इससे कैसे बचें?
उतर. प्रदूषण आजकल हर जगह प्रभावित कर रहा है कैंसर से लेकर, स्कीन में भी कई बीमारियाँ हो जाती है प्रदूषण के कारण यंग ऐज में लडके हो या लडकियाँ सभी में ऑयली स्कीन होने से प्रदूषण से धूल व धुएँ से त्वचा चिपचिपी हो जाती है ये बैक्टीरिया जनरेट करते हैं जिससे पिम्पल (कील-मुहाँसे) की समस्या होना, बालों को भी नुकसान, कफ की समस्या, नजला, फंगल इन्फैक्शन जैसी समस्याएँ हो जाती है ऐसे में ज्यादा प्राब्लम न हो इसके लिए थिकी या चिपचिपी क्रीम का प्रयोग न करें। प्रदूषण के बचाव के लिए मुँह को ढकें, स्कॉर्फ, हेलमेट का प्रयोग करें सर्दियों में ऊनी कपडे व गर्मियों में सूती वस्त्र पहनें। घर से निकलने से पहलें व आने के बाद क्लींजर व मॉश्च्युराइजर का प्रयोग जरूर करें जिससे त्वचा खराब न हो।

प्र.3. लडकियों में पिम्पल की समस्या ज्यादा होती है इसका क्या इलाज है?
उतर. पिम्पल्स लडके व लडकियों दोनों में टीन ऐज (किशोर अवस्था) से ही होता है जिसे नकारा नही जा सकता है किसी में कम तो किसी में ज्यादा, ये समस्या होती ही होती है इसे तुरन्त भी ठीक नही किया जा सकता इसके बचाव के लिए सबसे महत्वपूर्ण चेहरे के लिए क्लींजर या फैशवॉस का प्रयोग रोजाना करें। ज्यादा ऑयली त्वचा होने पर तेल का प्रयोग नही, त्वचा अगर रूखी हो तो मॉश्च्युराइजर का प्रयोग करें, अगर डैंड्रफ ज्यादा हो तो ऐसे में पिम्पल से चेहरे पर निशान ज्यादा हो जाते हैं ऐसी स्थिति में डॉक्टर की सलाह अनुसार नियमित रूप से इलाज लें और त्वचा की ज्यादा केयर करें ताकि अचानक से बढे कील मुँहासों को रोका जा सके और त्वचा भी सही एवं स्वस्थ रह सके।

प्र.4. आजकल मार्केट में ऐसे प्रोडक्ट हैं जिससे स्कीन को बहुत ज्यादा नुकसान हो सकता है तो ऐसे में क्या ये प्रोडक्ट फायदेमंद है या कोई अन्य प्रयोग द्वारा स्कीन का ख्याल रखा जाए?
उतर. आजकल भ्रातिं विद्यमान है कि प्रोडक्ट हमें गोरापन देंगे, जल्दी पिम्पल्स दूर कर देंगे, न केवल ज्यादा मात्रा में प्रयोग करने से साईड इफैक्टस का खतरा बढता है बल्कि त्वचा को नुकसान भी पहुँचता है। डॉक्टर की सलाह अनुसार सही मात्रा व तरीके से स्कीन को ध्यान में रखते हुए किसी भी क्रीम का प्रयोग किया जाए तो नुकसान नही होता है ज्यादा बाह्य उत्पादों को प्रयोग करने से त्वचा एक वक्त के बाद कम ग्लो करने लगती है क्योंकि एडिक्सन होने से, बार-बार हम किसी भी क्रीम का प्रयोग करें तो ऐसी समस्या हो सकती है ऐसे में हर्बल प्रोडक्ट का प्रयोग जैसे-एलोवीरा, कोकोनट ऑयल आधारित क्रीम का प्रयोग कर सकते हैं।

प्र.5. बियानी टाइम्स के पाठकों को आप क्या संदेश देना चाहते हैं?
उतर. मैं यही संदेश देना चाहूँगा कि सबसे पहलें स्कीन से जुडे हुए किसी भी उत्पाद का प्रयोग करने से डॉक्टर की सलाह जरूर लें, डर्मेटोलॉजिकल टेस्टेड प्रोडक्ट का प्रयोग करें। पानी ज्यादा पीएँ, फ्रूट व ज्यूस का नियमित रूप से प्रयोग करें। जंक फूड व फास्ट फूड का प्रयोग कम से कम करें क्योंकि ये शरीर के लिए नुकसानदायी हो सकते हैं। स्कीन के लिए मुख्यतयाः ऐरोबिक्स टाइप योगा को करें जिससे स्कीन व बालों को सुरक्षा मिलती है व साथ ही प्राकृतिक हर्बल प्रोडक्ट्स जिसमें कैमिकल की मात्रा न हो, का प्रयोग करके त्वचा को सुरक्षित रख सकते हैं।

साक्षात्कारकर्ताः संगीता शर्मा

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