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‘समय पर भारत अभियान’ की जरूरत

अभी २ अक्टूबर, २०१७ को स्वच्छ भारत दिवस मनाया गया। स्वच्छता के प्रति पहली बार देश में इतनी जागरूकता देखी जा रही है। मुझे लगता है कि स्वच्छता के बाद एक और महत्वपूर्ण अभियान पर काम करने की बहुत बड़ी आवश्यकता है। स्वच्छ भारत अभियान के बाद अब जरूरत है ‘समय पर भारत अभियानÓ की।। हम सब लोग समय की पाबंदी को विशेष महत्व नही देते है। कुछ वर्ष पूर्व जब मुझे जापान जाने का अवसर मिला मुझे यह देखकर अच्छा लगा कि सभी ट्रेन मिनट टू मिनट समय से चल रही थी। ट्रेन के आने के समय के आधार पर आप अपनी घड़ी को भी मिला सकते है। इंसान के जीवन में समय से ज्यादा महत्वपूर्ण कुछ भी नही है, इसके बावजूद हम लोग समय को बहुत खराब करते है। हमारे यहां बस, ट्रेन, हेलीकॉप्टर सभी समय से काफी पीछे चलते हैं। किसी भी कार्यक्रम में मंत्री, अधिकारी व शिक्षक एवं बुद्धिजीवी वर्ग भी देरी से पहुंचने को परम्परा समझने लगे हैं।
भारत ही शायद एक ऐसा देश है, जहां हर शुभ कार्य के लिए मुहूत्र्त निकालने की परंपरा है। शुभ मुहूत्र्त निकाले जाने के बावजूद भी हर कार्य में विलंब से किया जाता है। पिछले वर्षों से थम्ब इम्प्रेशन मशीनें सरकारी व गैर सरकारी संस्थानों में लगाई गई, बावजूद इसके इन दिनों मशीनों का भी तोड निकाल लिया गया है।
सवाल यह है कि आदमी मशीन को चलाए या मशीन आदमी को?
मुझे लगता है कि अब समय आ गया है कि ‘स्वच्छ भारतÓ के भांति हमारे प्रधानमंत्री ‘समय पर भारतÓ की पहल करें । अगर राष्ट्रीय स्तर पर स्वच्छता अभियान के भांति समय की पाबंदी एक राष्ट्रीय अभियान बना लिया जाए तो इसके बड़े सकारात्मक परिणाम मिलेंगे। एक ट्रेन के लेट होने से उसी ट्रेक पर चल रही बहुत सी अन्य ट्रेन भी लेट हो जाती है और इसी वजह से हजारों व्यक्तियों का समय खराब हो जाता है। अगर राष्ट्रीय स्तर पर इसकी पहल की जाए और समय पर फैशन और शिष्टाचार के रूप में अपना लिया जाए तो हमारे देश में आर्थिक एवं सामाजिक बदलाव आ सकता हैं।
आइये, इस दिवाली के शुभ अवसर पर समय को लक्ष्मी के रूप में स्वीकार करें, क्योंकि किसी ने सही कहा है कि समय ही धन है।
दिवाली के शुभ अवसर पर आप सभी पाठकों को अपनी शुभकामनायें प्रेम, स्नेह व सम्मान के साथ प्रेषित करता हूँ।

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