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योगी के सामने राज्य में सुरक्षा, सुशासन और विकास के एजेंडे का आगे बढ़ाने की चुनौती होगी

सांसद रहते मूलत: विपक्ष की भाषा बोलने के अभ्यस्त रहे योगी के सामने राज्य में सुरक्षा, सुशासन और विकास के एजेंडे का आगे बढ़ाने की चुनौती होगी।

गोरखपुर (संजय मिश्र)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भले ही बहुमत का संबल मिला है, लेकिन उनके सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं। सांसद रहते मूलत: विपक्ष की भाषा बोलने के अभ्यस्त रहे योगी के सामने राज्य में सुरक्षा, सुशासन और विकास के एजेंडे का आगे बढ़ाने की चुनौती होगी।

इनमें भी खासकर देश के विभिन्न हिस्सों में जिस पूर्वी उत्तर प्रदेश की वह आवाज उठाते रहे हैं, वहां विकास की नई इबारत लिखने की बड़ी जिम्मेदारी भी उनके कंधों पर आ गई है। इसके साथ उस गोरक्षपीठ की व्यवस्था को सुचारु बना रखने की चुनौती भी उनके सामने होगी, जिसने उन्हें देश भर में धर्म ध्वजा फहराने का अवसर दिया है।  उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के बाद वैसे तो मुख्यमंत्री पद के अनेक उम्मीदवार उभरे थे, लेकिन उनमें योगी सर्वश्रेष्ठ साबित हुए। इसका सबसे बड़ा कारण जनता के बीच उनका लोकप्रिय होना है।

वह भाजपा के उन बिरले सांसदों में हैं, जो विरोधी लहर में भी बड़े अंतर से जीतते रहे हैं। महज 26 साल की उम्र में संसदीय राजनीति में पदार्पण करने वाले योगी लगातार पांच बार सांसद चुने गए। वह कभी किसी प्रशासनिक पद पर नहीं रहे, लेकिन इसके बावजूद मुख्यमंत्री पद पर उनकी सफलता को लेकर कोई संदेह नहीं है।

इसका सबसे बड़ा कारण उनकी स्पष्ट और ईमानदार कार्यशैली तथा बेबाक व्यक्तित्व है। मंत्री न रहने के बावजूद उनमें किसी योग्य प्रशासक के गुण भरे हुए हैं। गोरक्षपीठ के प्रबंधन और उसके सरोकारों को उन्होंने जो ऊंचाई दी है, उससे उनकी प्रशासनिक क्षमता का भी परिचय मिलता है। वह इस पीठ के ऐसे महंत हैं, जिन्होंने उसे शैक्षिक, सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में अतुलनीय विस्तार दिया है। पीठ और गोरक्षनाथ मंदिर की व्यवस्था को तार्किक और व्यावहारिक बनाने का श्रेय भी योगी को है। अब तो कंप्यूटर पर एक क्लिक पर ही पीठ का पूरा तंत्र दिखने लगता है।

शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में योगी ने बड़े काम किए हैं। उनके महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद से 40 से अधिक शैक्षणिक संस्थान संचालित होते हैं। मंदिर परिसर में स्थापित गोरक्षनाथ चिकित्सालय पूर्वी उत्तर प्रदेश एवं बिहार के सीमावर्ती जिलों के लोगों की स्वास्थ्य समस्या का निदान कर रहा है। अस्पताल ने सस्ता और सुलभ चिकित्सा व्यवस्था का नमूना पेश किया है। गोरखपुर में पीठ का एक बड़ा मेडिकल कालेज भी प्रस्तावित है। उसका भूमि पूजन हो चुका है। इसके बावजूद बेहद पिछड़े क्षेत्र पूर्वांचल में कानून व्यवस्था, बिजली, स्वास्थ्य व शिक्षा का बुनियादी ढांचा दुरुस्त करना उनके लिए बड़ी चुनौती होगी।

औद्योगिक विकास को देनी होगी गति

समस्याओं की बात करें तो गोरखपुर अंचल में भी विकास की राह पथरीली हो चुकी है। 1989 में स्थापित गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण में वैसे तो तीन सौ उद्योग पंजीकृत हैं, लेकिन बमुश्किल 30 भी ठीक से नहीं चल रहे। योगी ने बड़ी मेहनत से गीडा में फूड पार्क एवं टेक्सटाइल पार्क का प्रस्ताव तैयार कराया था। फूड पार्क के लिए शासन की ओर से कुछ औपचारिकताएं भी शुरू की गई थीं, लेकिन यह सब कागजों में रह गईं। माना जा रहा था कि फूड पार्क और टेक्सटाइल पार्क की स्थापना से गोरखपुर में बड़ी संख्या में रोजगार का सृजन होगा, लेकिन ऐसा हो न सका। रोजगार के अवसर न होने से गोरखपुर, देवरिया, महराजगंज, कुशीनगर, बस्ती, संतकबीरनगर एवं सिद्धार्थनगर से बड़ी संख्या में युवा मुंबई एवं दूसरे महानगरों का रुख करते हैं।

बिजली आपूर्ति व्यवस्था सुधारनी होगी

चुनावी मौसम को छोड़ दें तो पूर्वांचल में गर्मी के दिनों में बिजली का रोना रहा है। चुनावी मंच पर भी बिजली बड़ा मुद्दा थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा अखिलेश यादव एवं योगी आदित्यनाथ के बीच बिजली को लेकर खूब वाकयुद्ध हुआ। लोग उम्मीद लगाए हैं कि योगी के मुख्यमंत्री बनने के बाद यहां 24 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी।

खाद कारखाना व एम्स का निर्माण जल्द शुरू कराना होगा

लगभग ढाई दशक से बंद गोरखपुर खाद कारखाना का 22 जुलाई 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों शिलान्यास कराकर योगी ने विकास की जो उम्मीद जगाई, उसे पूरा करने की जिम्मेदारी भी उनके कंधों पर है। एम्स के निर्माण की बाधाएं दूर करने के साथ यहां सड़क, एवं यातायात का ढांचा भी मजबूत करने की बड़ी चुनौती है।

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