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]]>राजस्थान की पहली वंदे भारत ट्रेन का आज शेड्यूल जारी होगा । इसके साथ ही आईआरसीटीसी समेत दूसरे ऑनलाइन प्लेटफार्म पर ट्रेन के लिए बुकिंग शुरू हो जाएगी। ट्रेन का शेड्यूल जारी होने में देरी के पीछे कारण स्टॉपेज है। दिल्ली से अजमेर के बीच तीन स्टॉपेज देने की प्लानिंग है, लेकिन रेवाड़ी पर स्टॉपेज करने की मांग बढ़ रही है, जिसके कारण शेड्यूल तय करने में देरी हो रही है। करीब 443 किलोमीटर लम्बे इस सफर को वंदेभारत ट्रेन से करीब 4 घंटे का समय लगेगा। वंदे भारत ट्रेन के चलने के साथ ही जयपुर से दिल्ली के बीच हर रोज 10 ट्रेनों का संचालन होने लगेगा। इसमें डबल-डेकर, राजधानी और शताब्दी ट्रेने भी शामिल है। जबकि 6 ऐसी ट्रेने है जो सप्ताह में 3 या 4 दिन संचालित होती है।
बुधवार को होगा उद्घाटन :-
वंदे भारत ट्रेन का उद्घाटन रन 12 अप्रैल को जयपुर जंक्शन से होगा। इस ट्रेन को नई दिल्ली से प्रधानमंत्री वर्चुअल हरीझंडी दिखाएंगे। वहीं जयपुर से रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव खुद बैठकर इस ट्रेन में सफर करेंगे। इस दौरान उनके साथ नॉर्थ-वेर्स्टन रेलवे के जीएम विजय शर्मा और अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहेंगे।

मार्च में हुआ था 3 दिन ट्रायल रन :-
वन्दे भारत ट्रेन का मार्च में तीन दिन ट्रायल किया गया था। तब इस ट्रेन को अजमेर से नई दिल्ली के बीच करीब 110 किलोमीटर प्रतिघंटा की स्पीड से चलाया गया था। ट्रायल रन के दौरान ही ट्रेन में स्टाफ की तैनाती को लेकर अजमेर और जयपुर मंडल के कर्मचारियों ने बखेड़ा खड़ा कर दिया था। दोनों ही मंडल के कर्मचारी संगठन अपने-अपने यहां से कर्मचारियों को टिकट चेकिंग और ऑपरेशन के लिए तैनाती चाहते थे।
इन रूट्स पर चलती है वंदे भारत ट्रेन :-
देश में कुल 13 वंदे भारत ट्रेनों का संचालन हो रहा है। पहली ट्रेन नई दिल्ली से वाराणसी के बीच जनवरी 2019 में शुरू की गई थी। इसके बाद यह अत्याधुनिक ट्रेन नई दिल्ली-वैष्णो देवी, गांधीनगर-मुंबई, दिल्ली-अंब अंदौरा(हिमाचल प्रदेश), चेन्नई-मैसूर, नागपुर-बिलासपुर, हावड़ा-न्यू जलपाईगुड़ी, विशाखापट्टनम-सिकंदराबाद, मुंबई-साईंनगर शिर्डी, मुंबई-सोलापुर और भोपाल-दिल्ली के बीच शुरू की गई। इसके अलावा पिछले सप्ताह से चेन्नई-कोयंबटूर और सिकंदराबाद-तिरुपति के बीच भी ट्रेन का संचालन शुरू हो गया है।
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]]>The post क्यों मानते है विश्व स्वास्थ्य दिवस? appeared first on Biyani Times.
]]>पहली बार वर्ल्ड हेल्थ डे कब मनाया :-
1948 में पहली बार विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वर्ल्ड हेल्थ असेंबली का गठन किया. जिसमें पहली बार 7 अप्रैल 1950 को विश्व स्वास्थ्य दिवस मनाया. तभी से हर साल इसी तारीख को पूरी दुनिया वर्ल्ड हेल्थ डे मनाती है।

आखिर क्यों मनाया जाता है वर्ल्ड हेल्थ डे –
1950 को पहली बार डब्ल्यूएचओ से जुड़े सभी देशों ने विश्व स्वास्थ्य दिवस मनाया था।उसके बाद जैसे जैसे देश डब्ल्यूएचओ से जुड़ते हुए, वहां हर साल अप्रैल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य दिवस मनाने की शुरुआत हुई। डब्ल्यूएचओ की 75वीं वर्षगांठ वर्ष सार्वजनिक स्वास्थ्य सफलताओं को देखने का एक अवसर है जिसने पिछले सात दशकों के दौरान जीवन की गुणवत्ता में सुधार किया है| यह आज और कल की स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए कार्रवाई को प्रेरित करने का अवसर भी है|
विश्व स्वास्थ्य दिवस की थीम :-
विश्व स्वास्थ्य दिवस एक वैश्विक स्वास्थ्य जागरूकता दिवस है जिसका उद्देश्य विश्व स्वास्थ्य संगठन के लिए चिंता के प्राथमिकता वाले क्षेत्र को उजागर करने के लिए एक विशिष्ट स्वास्थ्य विषय के बारे में जागरूकता पैदा करना है| इस तारीख के लिए हर साल, एक विषय चुना जाता है जो डब्ल्यूएचओ के लिए प्राथमिकता चिंता के क्षेत्र पर प्रकाश डालता है। WHO ने इस साल “हेल्थ फॉर ऑल” थीम के साथ इसे मनाने का फैसला किया है। इस बार का विषय इस सोच को दर्शाता है कि, स्वास्थ्य एक बुनियादी मानव अधिकार है और हर किसी को बिना किसी वित्तीय कठिनाइयों के जब और जहां इसकी आवश्यकता हो उसे स्वास्थ्य सेवाएं मिलनी चाहिए।
थीम का मतलब हैं – जीवेम शरदः शतम
भारत की संस्कृति में सबको सौ वर्ष के जीवन की शुभकामनाएं दी जाती हैं| स्वस्थ रहने के लिए दुनिया में भी योग और आयुर्वेद के प्रति रुझान बढ़ता जा रहा है| इसके साथ ही आयुष इंडस्ट्री का भी लगातार विस्तार हो रहा है| हेल्थ सेक्टर में भारत में लगातार नए स्टार्टअप भी जन्म ले रहे हैं| हेल्थ बिल्कुल वेल्थ के जैसे है, जब तक हम उसे खो नहीं देते, हमें उसकी सही कीमत समझ नहीं आती| कुछ स्वास्थ्य समस्याएं आने पर हमें लगता है कि अब हमें स्वास्थ्य पर ध्यान देने की जरुरत है| लेकिन कुछ कदम उठाकर हम स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को काफी हद तक कम कर सकते हैं|
स्वस्थ आहार खाएं, नमक और चीनी का कम सेवन करें
शराब के हानिकारक उपयोग से बचें, धूम्रपान न करें
समय पर स्वास्थ्य परीक्षण करवाएं और जांच कराएं
टीका लगवाएं
अपने शरीर को हाइड्रेट रखें
शारीरिक रूप से सक्रिय रहे, रोज कम से कम 8000 कदम चलें
खाना सही से चबा करके खाएं
खांसते या छींकते समय अपने मुंह को ढंकें
यातायात कानूनों का पालन करें
समय पर स्वास्थ्य परीक्षण करवाएं और जांच कराएं
विश्व स्वास्थ्य दिवस का उद्देश्य :-
कोरोना महामारी से जूझ रही दुनिया इस साल अपना 72वां विश्व स्वास्थ्य दिवस मना रही है। ऐसे में इस दिवस का महत्व कई गुना ज्यादा बढ़ गया है। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य लोगों को अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत रखना है। दुनियाभर में लाखों की संख्या में लोग आज कई बड़ी बीमारियों से जूझ रहे हैं। जिसमें कोरोना, टीबी, पोलियो, कैंसर और एड्स जैसी कई घातक बीमारियां शामिल हैं। ऐसे में लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरुक करना ही इस दिवस का मुख्य उद्देश्य है।
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]]>The post होली क्यों मनाई जाती है ? appeared first on Biyani Times.
]]>त्योहार भारतीय जीवन-शैली का अभिन्न हिस्सा हैं, यहाँ कई तरह के रंग-बिरंगे व विविथतापूर्ण त्योहार मनाए जाते हैं। इनमें से आपसी प्रेम और सद्भावना की भावना को मजबूत करने वाला होली का पर्व विशेष महत्व रखता है। विविधतापूर्ण संस्कृति वाले भारत देश में होली एक महत्वपूर्ण त्योहार है जो कि जीवन के उत्साह, उल्लास और उमंग को बनाए रखने का काम करता है।
होली का त्योहार कब मनाया जाता है ?
होली “रंगो का त्योहार” के नाम से भी जाना जाता है, हिंदुओं के सबसे प्रमुख त्योहारों में से एक है। फाल्गुन (फागुन) मास की पूर्णमासी के दिन होलिका दहन किया जाता है और इसके अगले दिन चैत्र (चैत) मास की कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा को रंगोत्सव यानी होली का त्योहार मनाया जाता है। यह त्योहार दुनिया भर के लोगों के द्वारा बेहद ही जोश व उत्साह के साथ मनाया जाता है। हालांकि यह हिंदुओं का त्योहार माना जाता है, लेकिन विभिन्न समुदायों के लोग साथ मिलकर, उत्साह और उमंग के साथ बड़ों को भी बच्चा बना देने वाले इस त्योहार में मनोरंजक कार्य करते नजर आते है।

होली क्यों मनाई जाती है ?
होली शुरुआत से ही एक पौराणिक कथा से जुडी है। विष्णुपुराण की एक कथा के अनुसार दैत्यों के राजा हिरण्यकश्यप ने अपने राज्य में विष्णु पूजा प्रतिबंधित कर रखी थी। लेकिन उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त निकला और वह दिन-रात विष्णु भगवान की भक्ति में लीन रहता था । दैत्यों के राजा हिरण्यकश्यप को यह पसंद नहीं था। ऐसे में जबहिरण्यकश्यप प्रह्लाद को विष्णु भगवान की भक्ति करने से रोक पाने में असफल होने लगे तो उन्होंने प्रह्लाद को मारने का आदेश दिया। हाथी के पैरों तले कुचलने और पहाड़ से फेंककर भी जब प्रहलाद नहीं मार तो हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका की मदद से प्रह्लाद को जलाकर मारने की योजना बनाई।होलिका को यह वरदान मिला था कि अग्नि में वह नहीं जलेगी। इसलिए लकड़ियों के ढेर पर वह प्रह्लाद को गोद में लेकर बैठ गई और उसमें आग लगा दी गई। इस होलिका की गोद में बैठा बालक प्रह्लाद विष्णु भगवान का नाम जपता रहा और उसका बाल भी बाँका नहीं हुआ, जबकि वरदान प्राप्त होलिका अपनी गलत विचारो के कारण जलकर भस्म हो गई। बुराई पर अच्छाई की जीत की याद में तभी से ही होली का त्योहार मनाया जा रहा है।
होली कैसे मनाई जाती है ?
यह रंगों का त्योहार मुख्य रूप से दो दिन मनाया जाता है, जिसके पहले दिन होलिका जलाई जाती है। होलिका दहन का पहला काम एक डंडा गड़ना होता है जो की होलिका का प्रतीक माना जाता है। डंडे को किसी सार्वजनिक स्थान पर गाड़ा जाता है, इसके लिए काफी दिन पहले से ही तैयारियां शुरू हो जाती है। होली का पहला दिन होलिका दहन कहलाता है।इस दिन गाड़े हुए डंडे के पास बहुत सारे लकड़ी इकट्ठी की जाती है, जो की लोग अपने अपने घरों से लाकर इकठ्ठा करते हैं। गाड़े हुए डंडे (और लकड़ियों) के पास सुबह से ही विधिवत पूजा होता है और घरों में पकवान बनाए जाते है और उसका भोग लगाया जाता है। शाम को सही मुहूर्त पर होलिका दहन किया जाता है। लोग देर रात तक नाचते और गाते है। होलिका दहन समाज की समस्त बुराइयों के अंत का प्रतीक है।
होली के दिन सभी लोग एक दूसरे को रंग, गुलाल लगाते हैं और नाच गाना भी करते हैं और घर घर जाकर एक दूसरे को होली की बधाई देते हैं। होली के त्योहार के दिन सभी के घरों में मीठे पकवान बनाए जाते हैं, खास कर गुजिया बनाई जाती है, इसके अलावा विभिन्न प्रकार के नमकीन और मिठाई बनाने का रिवाज भी है। होली के दिन लोग पुरानी दुश्मनी को छोड़ कर एक दूसरे को गले लगा कर एक नई शुरुआत करते हैं और होली की बधाई देते हैं। होली के दिन दोपहर तक लोग रंग गुलाल और नाच गाना करते हैं और उसके बाद लोग नहा धोकर नए नए कपड़े पहनते हैं और सबसे मिलते जुलते हैं।
होली से जुडी की कुछ रोचक बाते :-
(1 ) शास्त्रीय संगीत का होली से गहरा संबंध है। हालांकि ध्रुपद, धमार और ठुमरी के बिना आज भी होली अधूरी है। वहीं राजस्थान के अजमेर शहर में ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर गाई जाने वाली होली के गानों का रंग ही अलग है।
(2 ) संस्कृत साहित्य में होली के कई रूप हैं. जिसमें श्रीमद्भागवत महापुराण में होली को रास का वर्णन किया गया है। महाकवि सूरदास ने वसन्त एवं होली पर 78 पद लिखे हैं।
(3 ) मुगल बादशाह बहादुर शाह ज़फ़र के बारे में प्रसिद्ध है कि होली पर उनके मंत्री उन्हें रंग लगाने जाया करते थे। वहीं हिन्दी साहित्य में कृष्ण की लीलाओं में भी होली का विस्तार रूप से वर्णन किया गया है।
(4 ) शाहजहां के समय तक होली खेलने का मुग़लिया अंदाज़ ही बदल गया था। शाहजहां के ज़माने में होली को ‘ईद-ए-गुलाबी’ या ‘आब-ए-पाशी’ (रंगों की बौछार) कहा जाता था।
(5) अकबर का जोधाबाई के साथ तथा जहांगीर का नूरजहां के साथ होली खेलने का वर्णन इतिहास में है। अलवर संग्रहालय के एक चित्र में जहांगीर को होली खेलते हुए दिखाया गया है।
होली का त्योहार आकर्षक और मनोहर रंगों का त्योहार है, यह एक ऐसा त्योहार है जो हर धर्म, संप्रदाय, जाति के बंधन की सीमा से परे जाकर लोगों को भाई-चारे का संदेश देता है। इस दिन सारे लोग अपने पुराने गिले-शिकवे भूल कर गले मिलते हैं और एक दूजे को गुलाल लगाते हैं और एक-दूसरे को होली के पावन पर्व की शुभकामनाएँ देते हैं।
होली अंदर के अहंकार और बुराई को मिटा कर सभी के साथ घुल-मिलकर, भाई-चारे, प्रेम और सौहार्द्र के साथ रहने का त्योहार है। बच्चे अपनी इच्छानुसार रंग और गुलाल और पिचकारी खरीदते हैं और लोगों को रंगों से सराबोर करने का आनंद उठाते हैं। हमें इस बात को समझना होगा कि होली मिल-जुलकर, प्रेम से रहने और जीवन के रंगों को अपने भीतर आत्मसात करने का त्योहार है। इसलिए रंगों का प्रयोग सावधानीपूर्वक करना चाहिए और पानी या रंग भरे बैलून चलाने से बचना चाहिए। होली का त्योहार हमें हमेशा सन्मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। होली का त्योहार सामाजिक सद्भावना का प्रतीक है। इस त्योहार के कारण लोगों में सामाजिक एकता की भावना मजबूत होती है।
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]]>The post सुप्रीम कोर्ट ने राजद्रोह कानून पर तत्काल लगाई रोक, समीक्षा होने तक दर्ज नहीं होगी नई FIR appeared first on Biyani Times.
]]>सुप्रीम कोर्ट के आदेश की 5 बड़ी बातें
1. राजद्रोह कानून पर सरकार फिर से विचार करे- सुप्रीम कोर्ट
2. सुप्रीम कोर्ट ने कहा- राजद्रोह के तहत कानून का इस्तेमाल ठीक नहीं
3. सुप्रीम कोर्ट ने कहा- जो जेल में वो अर्जी दे सकते
4. SC ने अपनी सुनवाई में कहा कि जब तक समीक्षा तब तक कार्रवाई पर रोक रहेगी
5. अदालत ने कहा कि केंद्र-राज्य सरकारें FIR से परहेज करें
राजद्रोह के तहत कानून का इस्तेमाल ठीक नहीं
उच्चतम न्यायालय ने केन्द्र और राज्यों से कहा कि वे राजद्रोह के आरोप में प्राथमिकी दर्ज करने से बचें. उच्चतम न्यायालय राजद्रोह के आरोप से संबंधित सभी लंबित मामले, अपील और कार्यवाही को स्थगित रखा जाना चाहिए। राजद्रोह मामले में उच्चतम न्यायालय ने कहा कि आरोपियों को दी गई राहत जारी रहेगी. प्रावधान की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर जुलाई में होगी सुनवाई।
जुलाई में होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कि अगर राजद्रोह के मामले दर्ज किए जाते हैं, तो वे पक्ष राहत के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाने के लिए स्वतंत्र हैं। अदालतों को ऐसे मामलों का तेजी से निपटारा करना होगा। कोर्ट ने कहा कि आरोपी को राहत मिलना जारी रहेगा। राजद्रोह कानून के प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिका पर अगली सुनवाई जुलाई में होगी।
गौरतलब है कि बुधवार को सुनवाई के दौरान सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में केंद्र सरकार की ओर से पक्ष रखा। तुषार मेहता ने कहा कि गंभीर अपराधों को दर्ज होने से नहीं रोका जा सकता है। प्रभाव को रोकना सही दृष्टिकोण नहीं हो सकता है इसलिए, जांच के लिए एक जिम्मेदार अधिकारी होना चाहिए और उसकी संतुष्टि न्यायिक समीक्षा के अधीन है। उन्होंने आगे कहा कि राजद्रोह के मामले दर्ज करने के लिए एसपी रैंक के अधिकारी को जिम्मेदार बनाया जा सकता है।
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]]>The post कोविड वेक्सिनेशन का आंकड़ा 173.42 करोड़ के पार, एक दिन में 44 लाख से ज्यादा लोगों ने लगाए टीके appeared first on Biyani Times.
]]>वहीं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि 15-18 आयु वर्ग के कम से कम एक करोड़ लोगों को वैक्सीन की दोनों डोज लग चुकी हैं। स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने ट्वीट करते हुए लिखा, ‘युवा भारत का ऐतिहासिक कदम. 15-18 आयुवर्ग के एक करोड़ से अधिक किशोरों का फुल वैक्सीनेशन किया जा चुका है। ’

मंत्रालय ने बताया कि देश में अब तक 5.04 करोड़ से अधिक किशोरों को वैक्सीन की पहली डोज दी गई है. बता दें कि भारत में 15 से 18 वर्ष आयु वर्ग के किशोरों का वैक्सीनेशन तीन जनवरी से शुरू हुआ था।
मंत्रालय ने बताया कि देश में पिछले 24 घंटों में एक्टिव मरीजों की संख्या में 102039 की कमी दर्ज की गई है। देश में दैनिक पॉजिटिविटी रेट 4.44 प्रतिशत है. जबकि विकली पॉजिटिविटी रेट 6.58 प्रतिशत , वहीं, रिकवरी रेट अब 96.95 प्रतिशत हो गया है। इस बीच, इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने बताया कि देश में बुधवार को कोरोना वायरस के लिए 15,11,321 सैंपल टेस्ट किए गए, जिसके बाद देश में सैंपल टेस्टिंग का आंकड़ा अब 74,61,96,071 हो गया है।
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]]>The post PF New Rules: 1 अप्रैल से पीएफ खाते पर भी लगेगा टैक्स, जानें आप पर क्या होगा असर appeared first on Biyani Times.
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इन पीएफ अकाउंट्स पर लगेगा टैक्स
गौरतलब है कि पिछले साल सरकार ने नए इनकम टैक्स नियमों को नोटिफाई किया था। अब इसके तहत पीएफ अकाउंट्स को दो हिस्सों में बांटा जाएगा। इनमें केंद्र को सालाना 2.5 लाख रुपये से ज्यादा के एंप्लाई कॉन्ट्रिब्यूशन (Employee Contributions) होने की स्थिति में पीएफ इनकम पर टैक्स लगाया जाएगा। दरअसल, हाई इनकम वाले लोगों को सरकारी वेलफेयर स्कीम का फायदा लेने से रोकना ही नए नियमों का उद्देश्य है।
नए नियमों में ये है खास बातें
मौजूदा पीएफ खातों को कर योग्य और गैर-कर योग्य योगदान खातों में विभाजित किया जाएगा। साथ ही गैर-कर योग्य खातों में उनका समापन खाता भी शामिल होगा क्योंकि इसकी तिथि 31 मार्च, 2021 है। नए पीएफ नियम अगले वित्त वर्ष यानी 1 अप्रैल 2022 से लागू हो सकते हैं। इसमें खास बात ये है कि 2.5 लाख प्रति वर्ष से अधिक के कर्मचारी योगदान से PF आय पर नया कर लगाने के लिए IT नियमों के तहत एक नई धारा 9डी डाली गई है। कर योग्य ब्याज की गणना के लिए मौजूदा पीएफ खाते में दो अलग-अलग खाते भी बनाए जाएंगे।
इन टैक्सपेयर्स को फर्क नहीं पड़ेगा
आपको बता दें कि इस नए नियम के लागू होने के बाद, 2.5 लाख रुपये की लिमिट का फायदा ज्यादातर पीएफ सब्सक्राइबर्स को होगा। लेकिन छोटे और मध्यम वर्ग के टैक्सपेयर्स को नए नियम से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। यह मुख्य रूप से हाई इनकम वाले कर्मचारियों को प्रभावित करेगा। यानी अगर आपकी सैलरी कम है या एवरेज है तो आपको इस नए नियम से फरक नहीं पड़ेगा।
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]]>The post प्रधानमंत्री ने सोमनाथ में कई परियोजनाओं का उद्घाटन किया appeared first on Biyani Times.
]]>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को गुजरात स्थित सोमनाथ मंदिर के 1.5 किलोमीटर लंबे नवनिर्मित समुद्र दर्शन पथ और सोमनाथ प्रदर्शनी गैलरी का वर्चुअल उद्घाटन किया। इस गैलरी में सोमनाथ मंदिर के खंडित अवशेष संजोकर रखे गए हैं। प्रधानमंत्री ने सोमनाथ ट्रस्ट के अंतर्गत दोबारा निर्मित किए गए जूना सोमनाथ मंदिर का उद्घाटन और पार्वती मंदिर का शिलान्यास भी किया।प्रधानमंत्री ने जिन परियोजनाओं का उद्घाटन किया, उनमें सोमनाथ सैरगाह, सोमनाथ प्रदर्शनी केंद्र और पुराने (जूना) सोमनाथ का पुनर्निर्मित मंदिर परिसर शामिल हैं I
ये शिव ही हैं जो विनाश में भी विकास का बीज अंकुरित करते हैं, संहार में भी सृजन को जन्म देते हैं. इसलिए शिव अविनाशी हैं, अव्यक्त हैं और अनादि हैं. शिव में हमारी आस्था हमें समय की सीमाओं से परे हमारे अस्तित्व का बोध कराती है.”
प्रधानमंत्री का कहना है कि ये ऐसा स्थल है जिसे हजारों साल पहले हमारे ऋषियों ने ज्ञान का क्षेत्र बताया था, जो आज भी पूरे विश्व के सामने आहवान कर रहा है कि सत्य को असत्य से हराया नहीं जा सकता, आस्था को आतंक से कुचला नहीं जा सकता. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, इस मंदिर को सैकड़ों सालों के इतिहास में कितनी ही बार तोड़ा गया, यहां की मूर्तियों को खंडित किया गया, इसका अस्तित्व मिटाने की हर कोशिश की गई, लेकिन इसे जितनी भी बार गिराया गया, ये उतनी ही बार उठ खड़ा हुआ.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “आज मुझे समुद्र दर्शन पथ, सोमनाथ प्रदर्शन गैलरी और जीर्णोद्धार के बाद नए स्वरूप में जूना सोमनाथ मंदिर के लोकार्पण का सौभाग्य मिला है. साथ ही आज पार्वती माता मंदिर का शिलान्यास भी हुआ है. आज मैं, लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर को भी प्रणाम करता हूं जिन्होंने विश्वनाथ से लेकर सोमनाथ तक, कितने ही मंदिरों का जीर्णोद्धार कराया. प्राचीनता और आधुनिकता का जो संगम उनके जीवन में था, आज देश उसे अपना आदर्श मानकर आगे बढ़ रहा है.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “हमारे यहां जिन द्वादश ज्योतिलिंर्गों की स्थापना की गई है, उनकी शुरूआत सोमनाथ मंदिर से ही होती है. पश्चिम में सोमनाथ और नागेश्वर से लेकर पूरब में बैद्यनाथ तक, उत्तर में बाबा केदारनाथ से लेकर दक्षिण में भारत के अंतिम छोर पर विराजमान श्री रामेश्वर तक, ये 12 ज्योतिर्लिंग पूरे भारत को आपस में पिरोने का काम करते हैI
प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘स्टेच्यू ऑफ यूनिटी’ और गुजरात के कच्छ के परिवर्तन जैसी पहलों को गुजरात ने बहुत नजदीक से देखा है, आधुनिकता को पर्यटन से जोड़ने का परिणाम देखा है। उन्होंने “हर कालखंड की यह मांग रही है कि हम धार्मिक पर्यटन की दिशा में भी नई संभावनाओं को खोजें और लोकल अर्थव्यवस्था से तीर्थ यात्राओं का जो रिश्ता रहा है उसे और मजबूत करें।”
प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा, “सोमनाथ आने वाले श्रद्धालु अब यहां जूना सोमनाथ मंदिर के भी आकर्षक स्वरूप का दर्शन करेंगे, नए पार्वती मंदिर का दर्शन भी करेंगे. इससे यहां नए अवसरों और नए रोजगारों का भी सृजन होगा और स्थान की दिव्यता भी बढ़ेगी.
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