Breaking News

10 साल के बच्चे श्रेयश बाघमारे को एक दिन के लिए मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग का अध्यक्ष बनाया गया.

भोपाल: ‘प्रोजेरिया’ बीमारी का इलाज कुछ नहीं है. मध्यप्रदेश मे इस बीमारी से ग्रस्त एक 10 साल के बच्चे श्रेयश बाघमारे के जीवन में 24 मार्च, शुक्रवार का दिन यादगार बन गया. उसे एक दिन के लिए मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग का अध्यक्ष बनाया गया.  जबलपुर शहर के निवासी श्रेयस ने भोपाल आकर एक कार्यक्रम में बतौर आयोग अध्यक्ष हिस्सा लिया. उसे आयोग के अध्यक्ष की कुर्सी पर भी बैठाया गया.
मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष डॉ राघवेन्द्र शर्मा के मुताबिक ‘‘श्रेयश ने भोपाल घूमने की इच्छा व्यक्त की थी. श्रेयश और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे अन्य बच्चों को खुशी देने के लिए ही हमने उसे एक दिन के लिए आयोग का अध्यक्ष बनाने का फैसला लिया.’’

श्रेयश के पिता अरविंद बाघमारे ने बताया ‘‘श्रेयांश को हमने नागपुर के अस्पताल में दिखाया था. डॉक्टरों ने यही कहा कि इस बीमारी का इलाज कुछ नहीं है. ऐसे बच्चे अल्पायु होते हैं, इसलिए उन्हें हर समय खुश रखने का प्रयास करना चाहिए.’’ उन्होंने श्रेयश को एक दिन के लिए आयोग का अध्यक्ष बनाने के निर्णय पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि आज वह बेहद खुश हैं.

शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ पंकज शुक्ला के अनुसार प्रोजेरिया एक लाइलाज बीमारी है. लाखों लोगों में से एक व्यक्ति इसका पीड़ित होता है. मध्यप्रदेश में संभवत: श्रेयश अकेला इस बीमारी का मरीज होगा. उल्लेखनीय है कि अमिताभ बच्चन द्वारा अभिनीत फिल्म ‘पा’ में इस बीमारी एवं रोगी की मानसिकता का जीवंत चित्रण किया गया है.

श्रेयश बाघमारे ने शुक्रवार को भोपाल के समन्वय भवन में बाल आयोग की राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान बच्चों से जुड़े कुछ अहम मुद्दों पर प्रदेश सरकार को निर्देश भी दिए. उन्होंने प्रदेश सरकार से अपील की कि सरकार प्रोजेरिया से ग्रसित बीमारों का इलाज मुफ्त में कराए. दिव्यांग बच्चों को मंच उपलब्ध कराने के लिए जिला स्तर पर आयोजन कराए जाएं. इस आयोजन के दौरान यूनीसेफ मध्यप्रदेश के चीफ माइकल जुमा सहित अन्य अतिथियों से श्रेयांस ने मुलाकात की.

Check Also

Explore Diverse and Creative Careers in Media and Communication

Journalism and Mass Communication is one of the most dynamic and rapidly evolving fields in …