बाड़मेर- नोटबंदी ने जहां एक ओर अमीरों की नींद उड़ा दी है, वहीं अब उन गरीबों को भी नींद नहीं आ रही है जो अब तक गरीबी की आड़ में अमीरी के मजे लूट रहे थे। सरकारी योजनाओं का फायदा उठाने के लिए उन्होनें खुद को बीपीएल सूची में दर्ज करवा दिया था, लेकिन अब उनके खातों में 50 हजार से अधिक रूपए आते ही बीपीएल की सूची पर सवाल खड़ा हो जाएगा।
बीपीएल सूची में ऐसे कई लोगों के नाम है जिनके बहुमंजिला मकान और अन्य सुविधाएं है। इन लोगों को कई बार राज्य सरकार की ओर से आग्रह भी किया गया कि स्वेच्छा से अपने नाम एपीएल में दर्ज करवा दे। इसके लिए उपखण्ड अधिकारी कार्यालय में आवेदन करने के साथ उल्लेख करना होता है कि अब आर्थिक स्थिति मे सुधार आया है और उनका नाम हटा दिया जाए लेकिन एक भी आवेदन इस आशय के पिछले सालों में नहीं आया है। ऐसे में जितने लोग बीपीएल में दर्ज थे। उससे घट नहीं रहे है।
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