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]]>बता दें, ऑनलाइन बैंक ट्रांसफर के लिए NEFT, RTGS और आईएमपीएस का इस्तेमाल किया जाता है। एनईएफटी यानी राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक निधि अंतरण (National Electronic Funds Transfer -NEFT)। आईएमपीएस यानी तत्काल भुगतान सेवा (Immediate Payment Service)।
NEFT के माध्यम से फंड ट्रांसफर मुख्य रूप से छोटे बचत खाताधारक करते हैं। RTGS का उपयोग बड़े फंड ट्रांसफर के लिए कंपनियां या संस्थाएं इत्यादि करते हैं | NEFT के माध्यम से भुगतान एक समय के बाद होता है लेकिन RTGS के माध्यम से भुगतान तुरंत उसी समय हो जाता है। NEFT का उपयोग छोटी राशि को भेजने के लिए किया जाता है जबकि RTGS के माध्यम से कम से कम 2 लाख रुपये का ट्रांसफर करना जरूरी होता है जबकि NEFT के मामले में ऐसी कोई न्यूनतम या अधिकत्तम की सीमा नहीं है।
आरटीजीएस डिजिटल फंड ट्रांसफर करने का एक तरीका है। इसकी मदद से रियल टाइम में पैसे ट्रांसफर हो जाते हैं। RTGS का उपयोग मुख्य रूप से बड़ी रकम के ट्रांसफर के लिए होता है। इसके तहत न्यूनतम 2 लाख रुपये भेजे जा सकते हैं जबकि अधिकतम राशि भेजने की सीमा 10 लाख रुपये है। आरटीजीएस के जरिए 2 लाख से 5 लाख तक का फंड ट्रांसफर करने के लिए अधिकतम शुल्क 24.5 रुपये है। 5 लाख से अधिक के फंड ट्रांसफर के लिए बैंक 49.5 रुपये का तक फीस ले सकता है। इस पर जीएसटी भी देनी पड़ती है। देश का सबसे बड़े बैंक एसबीआई आरटीजीएस पर कोई फीस नहीं लेता है।
RTGS की शुरुआत 26 मार्च 2004 को हुई थी। उस समय केवल 4 बैंक ही इस सेवा से जुड़े थे। लेकिन अब देश के 237 बैंक इस सिस्टम के जरिए 4.17 लाख करोड़ रुपये के लेन-देन को प्रतिदिन पूरा करते हैं। नवंबर में आरटीजीएस से औसत 57.96 लाख रुपये का लेनदेन हुआ। फिलहाल दूसरे और चौथे शनिवार को छोड़कर महीने के सभी कार्यदिवस पर सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक RTGS की मदद से फंड ट्रांसफर किया जाता है।
-एजेंसियां
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