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इसके अलावा इस प्राधिकरण के पास जुर्माना वसूली करने, शास्ति (पेनल्टी) लगाने तथा निजी शिक्षण संस्थानों की मान्यता / क्रमोन्नति निलंबित / बर्खास्त करने की अनुशंसा की शक्तियां भी होंगी। इस प्रस्तावित बिल में बताया गया है कि इस प्राधिकरण के द्वारा किए गए किसी भी फैसले को न्यायालय में चुनौती भी नहीं दी जा सकेगी। फीस एक्ट – 2016 होने के बावजूद भी इस प्राधिकरण द्वारा निजी शिक्षण संस्थानों की फीस पर भी नियमन व नियंत्रण प्रस्तावित किया गया है। बता दे कि राज्य सरकार ने 17 जनवरी 2023 को जरिए पब्लिक नोटिस इस बिल के साथ साथ राजस्थान कोचिंग इंस्टीट्यूट्स कंट्रोल एंड रेगुलेशन बिल – 2023 के विधानसभा में प्रस्तुत करने की जानकारी देते हुए 27 जनवरी तक इसमें अपने सुझाव मांगे थे। वहीं धीरे धीरे निजी शिक्षण संस्थानों के सामने इस बिल का प्रस्तावित मसौदा आ रहा है, सरकार के विरुद्ध असंतोष की भावना बढ़ती जा रही है। निजी शिक्षण संस्थानों के संचालकों ने प्रस्तावित इस प्राधिकरण को अनावश्यक बताते हुए इसका विरोध कर रहे है ।प्राईवेट शिक्षण संस्थानों का कहना है कि जब 1989 एक्ट, 1993 एक्ट, आरटीई एक्ट – 2009, फीस एक्ट – 2016 जैसे चार चार अधिनियमों से निजी शिक्षण संस्थानों को नियमित व नियंत्रित किया जा रहा है तो इस बिल को थोपना निजी शिक्षण संस्थानों के अधिकारों को आघात पहुँचाना है।
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