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उन्होंने कहा, “हम लोगों ने इसकी शुरुआत स्टार्टअप के तौर पर की है. लेकिन लगभग 2 साल से गूगल की कमियों को तलाशने में लगे हुए थे। ” बग्समिरर कंपनी में लगभग 15 सदस्य काम करते हैं।अमन का कहना है कि सैमसंग भी गलतियां तलाश करने पर इनाम दे चुकी है। अब आगे एक खास फंक्शन डेवलप में लगे हैं। प्ले स्टोर से एप डाउनलोड करने पर फीचर मिलेगा। फीचर पर आप क्लिक कर पता लगा सकते हैं कि एप आपके लिये सिक्यूरिटी पर्पज से कितना सही या गलत है।
गूगल से मिले इनाम की राशि पर के सवाल अमन ने कहा कि गूगल से मिले इनाम के तौर राशि का उपयोग कंपनी को आगे बढ़ाने में इस्तेमाल करेंगे। उन्होंने ये भी दावा किया कि गूगल ने अभी तक कई उपहार भी भेजे हैं। फिलहाल अभी अमन कई बड़ी कंपनियों के साथ काम रहे हैं। उनका कहना है कि अभी जिंदगी के सफर की शुरुआत हुई है, लेकिन मंजिल दूर है।
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]]>भारत में सबसे क्लीन सिटी का दर्जा हासिल करने के बाद मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) का शहर इंदौर (Indore) अब देश (India’s) का पहला वाटर प्लस सिटी (water plus’ city) बन गया है. कल बुधवार को इंदौर को भारत का पहला ‘वाटर प्लस’ शहर (Indore declared as India’s first ‘water plus’ city) घोषित किया गया है.
केंद्रीय शहरी एवं आवास मंत्रालय ने बुधवार शाम को यह घोषणा की है. बता दें कि चार बार देश में सबसे अधिक क्लीन सिटी का दर्जा पाने वाला इंदौर शहर अब पांचवीं बार भी इस स्थान पर कब्जा बनाए रह सकता है. बता दें कि वाटर प्लस सिटी के मुकाबले में गुजरात के दो शहर सूरत और अहमदाबाद और महाराष्ट्र से नवी मुंबई भी इस रेस में शामिल थे.
आवास और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा दिए गए प्रोटोकॉल और टूलकीट के अनुसार किसी शहर को Water Plus सर्टिफ़िकेशन तभी मिलता है, जब उस शहर के घरों, कमर्शियल बिल्डिंग्स से निकलने वाले वेस्ट वॉटर को नदी में बहाने से पहले एक सैटिस्फ़ैक्टरी लेवल तक ट्रीट किया गया हो.
इंदौर के ज़िलाधिकारी, मनीष सिंह ने बताया, ‘स्वच्छ सर्वेक्षण के Water Plus Protocol गाइडलाइन्स का पालन करते हुए इंदौर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने 25 छोटे-बड़े नालों में गिरने वाले 1,746 पब्लिक, 5,624 डॉमेस्टिक Sewer Outfall के पानी को रोका. इससे खान और सरस्वती नदी में भी सीवर का पानी नहीं गया.’
गौरतलब है कि ‘वॉटर प्लस’ की चयन प्रक्रिया में देश के 84 शहरों ने आवेदन किये थे. इसमें से सिर्फ 33 शहरों को जमीनी सत्यापन के लिये उचित पाया गया था. जमीनी सत्यापन में इंदौर शहरवासियों की मेहनत ने एक बार फिर इतिहास रचा है. स्वच्छता भारत मिशन शहरी के तहत देश के शहरों का विभिन्न स्वच्छता मानकों के आधार पर परीक्षण किया जाता है. इसमें ओडीएफ प्लस, ओडीएफ डबल प्लस और वॉटर प्लस की श्रेणियां हैं.
इंदौर में वॉटर प्लस का सर्वे 9 से 14 जुलाई के बीच हुआ था. केंद्रीय टीम ने शहर में लगातार 5 दिनों तक घूमकर सभी पैमानों पर जांच की थी. टीम ने कम्युनिटी टॉयलेट पब्लिक टॉयलेट के साथ 11 पैरामीटर पर इंदौर शहर में सर्वे किया था.
केंद्रीय टीम ने इंदौर शहर में 11 पैरामीटर्स को ध्यान में रखते हुए शहर की करीब 200 लोकेशनों का सर्वे किया था. जहां हर पैमाने पर खरा उतरने के बाद ही इंदौर शहर को यह उपलब्धि मिली है. खास बात यह है कि इस उपबल्धि के बाद इंदौर शहर का स्वच्छता रैंकिंग में लगातार 5वीं बार नंबर-1 बनने का दावा भी मजबूत हो गया है.
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