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]]>एएमयू के आधिकारिक बयान के अनुसार इस ऐतिहासिक अवसर को यादगार बनाने के लिए प्रधानमंत्री एक विशेष डाक टिकट भी जारी करेंगे। एएमयू के कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर ने मोदी के प्रति आभार जताया और कहा कि शताब्दी समारोह में शामिल होने की उनकी स्वीकृति के लिए विश्वविद्यालय परिवार कृतज्ञ है।
एक जमाने में इसे भारत का कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय भी कहा जाता था। ब्रिटिश राज के समय यह कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय की तर्ज पर बनाया गया पहला उच्च शिक्षण संस्थान था। इसकी स्थापना 1857 के दौर के बाद भारतीय समाज की शिक्षा के क्षेत्र में पहली उपलब्धि मानी जाती है।
1967 में अजीज पाशा नामक व्यक्ति की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने एएमयू को अल्पसंख्यक संस्थान मानने से मना कर दिया था। लेकिन बाद में 1981 में तत्कालीन केंद्र सरकार ने फिर से कानून में संशोधन किए और विश्वविद्यालय का अल्पसंख्यक दर्जा बहाल कर दिया। कई बार इसके नाम और दर्जे को बदलने की मांग भी उठती रही है। हालांकि, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2005 में एएमयू को अल्पसंख्यक का दर्जा देने वाला कानून रद्द कर दिया और कहा कि अजीज पाशा मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला सही है।
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