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कारगिल विजय दिवस Archives - Biyani Times https://biyanitimes.com/tag/कारगिल-विजय-दिवस/ Positive News Tue, 26 Jul 2022 07:06:50 +0000 en-US hourly 1 कारगिल विजय दिवस: पराक्रम और शौर्य की कहानी https://biyanitimes.com/kargil-diwas-2022/ Tue, 26 Jul 2022 07:06:50 +0000 https://biyanitimes.com/?p=8195 26 जुलाई 1999 को भारत ने कारगिल युद्ध में विजय हासिल की थी। इस दिन को हर वर्ष विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है। करीब दो महीने तक चला कारगिल युद्ध भारतीय सेना के साहस और जांबाजी का ऐसा उदाहरण है जिस पर हर देशवासी को गर्व होना चाहिए। करीब 18 हजार फीट …

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26 जुलाई 1999 को भारत ने कारगिल युद्ध में विजय हासिल की थी। इस दिन को हर वर्ष विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है। करीब दो महीने तक चला कारगिल युद्ध भारतीय सेना के साहस और जांबाजी का ऐसा उदाहरण है जिस पर हर देशवासी को गर्व होना चाहिए। करीब 18 हजार फीट की ऊंचाई पर कारगिल में लड़ी गई इस जंग में देश ने लगभग 527 से ज्यादा वीर योद्धाओं को खोया था वहीं 1300 से ज्यादा घायल हुए थे।

पहले ही शुरू हो गई थी तैयारी

भारत को पाकिस्तान की इस हरकत के बारे में मई में पता चला लेकिन इसकी तैयारी दुश्मन ने कई महीनों पहले से ही शुरू कर दी।  नवंबर 1998 में पाकिस्तानी सेना के एक ब्रिगेडियर को करगिल सेक्टर की रेकी करने भेजा गया था।  उनकी रिपोर्ट के आधार पर ही इस पूरे प्लान को अंजाम दिया गया। जनवरी 1999 में पकिस्तान के स्कर्दू और गिलगिट में तैनान फ्रंटियर डिविजन के जवानों की छुट्टियां रद्द कर दी गईं।  पकिस्तान के ये हिस्से भी उंची पहाड़ियों वाले थे।  सर्दियों में ये लोग भी अपनी चौकियां छोड़कर छुट्टियां मनाने घर लौट जाते थे।  शुरुआत में 200 जवानों को सिविल ड्रेस में भारतीय सीमा में भेजा गया।  लेकिन जब पता चला कि यहां भारतीय सेना का कोई जवान नहीं है, तो और जवान बुलाए जाने लगे सर्दियां खत्म होते-होते तक 200 से 300 वर्ग किलोमीटर का हिस्सा पाकिस्तान ने कब्जा लिया।

जब भारत के सैनिकों को हुई खबर 

मई 1999 तक भारत को पाकिस्तानी घुसपैठियों की इस हरकत के बारे में पता ही नहीं चल सका।  फिर एक दिन जब चरवाहे वहां तक पहुंचे तो उन्होंने देखा कि कुछ हथियारबंद लोग भारतीय चौकियों पर कब्जा किए हुए हैं।  उन्होंने आकर पूरी बात भारतीय सेना को बता दी।  8 मई 1999 को ये जंग शुरू हुई। भारतीय जवानों ने भी ऊंचाई पर पहुंचना शुरू कर दिया और फिर ऑपरेशन विजय की शुरुआत हुई।  इस जंग में भारतीय सेना के साथ-साथ वायुसेना ने भी मोर्चा संभाला।  भारतीय सेना के साथ एक दिक्कत ये भी थी कि वो नीचे थी और घुसपैठिए ऊंचाई पर थे, लेकिन उसके बावजूद भारतीय सेना उन्हें खदेड़ती चली गई और भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के खिलाफ मिग-27 और मिग-29 का भी इस्तेमाल किया। इसके बाद जहां भी पाकिस्तान ने कब्जा किया था वहां बम गिराए गए।

इसके अलावा मिग-29 की सहायता से पाकिस्तान के कई ठिकानों पर आर-77 मिसाइलों से हमला किया गया। इस युद्ध में बड़ी संख्या में रॉकेट और बम का इस्तेमाल किया गया। इस दौरान करीब दो लाख पचास हजार गोले दागे गए। वहीं 5,000 बम फायर करने के लिए 300 से ज्यादा मोर्टार, तोपों और रॉकेट का इस्तेमाल किया गया। लड़ाई के 17 दिनों में हर रोज प्रति मिनट में एक राउंड फायर किया गया। बताया जाता है कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यही एक ऐसा युद्ध था जिसमें दुश्मन देश की सेना पर इतनी बड़ी संख्या में बमबारी की गई थी और 26 जुलाई 1999 को करगिल में भारतीय तिरंगा लहरा दिया ।

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