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]]>20 से 23 सितंबर तक भारत और जापान के 20 से अधिक इंस्टीट्यूट्स के 32 से अधिक प्रोफेसर एवं प्रतिनिधि विद्यार्थियों को देंगे उच्च शिक्षा, करियर, रिसर्च, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ग्लोबल अवसरों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी
जयपुर, 18 सितम्बर 2026 । बियानी ग्रुप ऑफ कॉलेजेस की ओर से 21वां बियानी इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस (बायकॉन-2026) का आयोजन 20 से 23 सितंबर 2026 तक जयपुर में किया जाएगा। इस वर्ष कॉन्फ्रेंस की थीम “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फॉर स्मार्ट एंड रेजिलिएंट सोसाइटीज” रखी गई है। चार दिवसीय इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भारत और जापान के शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों, इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स, इनोवेटर्स और रिसर्च स्कॉलर्स द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, मीडिया, कानून और सामाजिक विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
कॉन्फ्रेंस का उद्देश्य भारत-जापान शैक्षणिक एवं औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देना, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में रिसर्च एवं इनोवेशन को प्रोत्साहित करना तथा विद्यार्थियों और फैकल्टीज को ग्लोबल एक्सपोजर प्रदान करना है। सम्मेलन में एक्सपर्ट टॉक्स, रिसर्च प्रेजेंटेशन और इंटरैक्टिव सेशन के जरिए नॉलेज एक्सचेंज किया जाएगा। साथ ही, बियानी ग्रुप ऑफ कॉलेजेस और जापान के ओसाका कॉलेज ऑफ टूरिज्म एंड बिजनेस, के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इस साझेदारी के माध्यम से विद्यार्थियों को क्रॉस-कल्चरल लर्निंग, एकेडमिक कोलैबोरेशन, स्किल डेवलपमेंट और इंटरनेशनल एक्सपोजर के नए अवसर मिलेंगे।
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साथ ही, कॉन्फ्रेंस के ऑर्गेनाइजिंग चेयर एवं डायरेक्टर (रिसर्च एंड डेवलपमेंट) प्रोफेसर डॉ. मनीष बियानी और कन्वीनर एवं असिस्टेंट डायरेक्टर (रिसर्च, डेवलपमेंट एंड ग्लोबल अफेयर्स) डॉ. राधिका बियानी डागा, के मार्गदर्शन में जापान की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज के 16 से अधिक प्रोफेसर एवं प्रतिनिधि बायकॉन-2026 में सहभागिता करेंगे। इनमें जापान एडवांस्ड इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (JAIST), जापान एक्सटर्नल ट्रेड ऑर्गनाइज़ेशन (JETRO), सायतामा यूनिवर्सिटी, कानाज़ावा यूनिवर्सिटी, इशिकावा प्रीफेक्चरल यूनिवर्सिटी, नाइतेई ब्रिज तथा ओसाका कॉलेज ऑफ टूरिज्म एंड बिजनेस प्रमुख रूप से शामिल हैं। वहीं भारत की ओर से आईआईटी दिल्ली, आईआईटी इंदौर, आईआईटी जोधपुर, आईआईटी कानपुर, सेंट्रल यूनिवर्सिटी हरियाणा, बीएचयू वाराणसी तथा जीएसएफसी गुजरात सहित विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के शिक्षाविद् एवं विशेषज्ञ सम्मेलन से जुड़ेंगे।
बियानी संस्थान पिछले दो दशकों से विशेष रूप से जापान के साथ अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग को बढ़ावा दे रहा है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों और फैकल्टी को एकेडमिक एक्सचेंज, रिसर्च कोलैबोरेशन और ग्लोबल एक्सपोजर के अवसर मिल रहे हैं।
कॉन्फ्रेंस के पहले दिन “स्टडी इन जापान: एक्सप्लोरिंग हायर एजुकेशन एंड करियर ऑपर्च्युनिटीज” विषय पर विशेष सत्र का आयोजन तक्षशिला ऑडिटोरियम, माहेश्वरी पब्लिक स्कूल, जवाहर नगर, जयपुर में किया जाएगा। इस सत्र में विद्यार्थियों को जापान में हायर एजुकेशन, स्कॉलरशिप, एडमिशन एवं करियर अवसरों की जानकारी मिलेगी और वे जापानी यूनिवर्सिटी प्रतिनिधियों, एलुमनाई एवं इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स से संवाद कर सकेंगे।
कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन साइंस, नर्सिंग, फार्मेसी, नेचुरोपैथी एवं योगिक साइंसेज विभाग द्वारा “द फ्यूचर ऑफ इंटेलिजेंट हेल्थकेयर एंड साइंटिफिक इनोवेशन” विषय पर विशेषज्ञों द्वारा विचार-विमर्श किया जाएगा। यह सत्र उत्सव ऑडिटोरियम, बियानी गर्ल्स कॉलेज, विद्याधर नगर, जयपुर में आयोजित होगा। इस दौरान एआई आधारित हेल्थकेयर, लाइफ साइंसेज, टेलीमेडिसिन, स्मार्ट नर्सिंग, नैनोमेडिसिन, क्लाइमेट चेंज और हेल्थकेयर इनोवेशन पर चर्चा होगी।
कॉन्फ्रेंस के तीसरे दिन कॉमर्स, मैनेजमेंट एवं आईटी विभाग द्वारा “बिल्डिंग द एआई-पावर्ड इकोनॉमी: इनोवेशन, स्ट्रेटेजी एंड गवर्नेंस” विषय पर सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इसमें ग्लोबल एआई एडॉप्शन, डिजिटल इनक्लूजन, एक्सप्लेनेबल एआई, प्रेडिक्टिव मॉडलिंग, डिसीजन सपोर्ट, बिजनेस ऑप्टिमाइजेशन, स्ट्रेटेजिक डिसीजन-मेकिंग और डेटा प्राइवेसी पर चर्चा होगी।
कॉन्फ्रेंस के चौथे दिन, दो सत्र आयोजित किए जाएंगे जिसमें प्रथम सत्र में सोशल साइंसेज एवं एजुकेशन विभाग द्वारा “इंटेलिजेंट सोसाइटीज: एआई ट्रांसफॉर्मिंग सोशल सिस्टम्स, ह्यूमन डेवलपमेंट एंड एजुकेशन” विषय पर चर्चा होगी। साथ ही द्वितीय सत्र में लॉ विभाग द्वारा “द फ्यूचर ऑफ लॉ एंड गवर्नेंस इन द एज ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस” विषय पर विचार-विमर्श किया जाएगा। इस सत्र में एआई एवं समाज, संस्कृति, शिक्षा, एथिक्स, मीडिया-जर्नलिज्म, डिजिटल कम्युनिकेशन, एआई-ड्रिवन क्रिएटिविटी, सस्टेनेबल डेवलपमेंट तथा एआई एंड लॉ, डेटा प्राइवेसी, साइबर लॉ, डिजिटल एविडेंस, साइबर सिक्योरिटी और पॉलिसी डिजाइन जैसे विषयों पर विशेषज्ञ विचार रखेंगे।
बायकॉन-2026 के माध्यम से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मानव विकास के बीच संतुलन, जिम्मेदार तकनीकी नवाचार तथा भारत-जापान के बीच भविष्य के शैक्षणिक एवं औद्योगिक सहयोग को नई दिशा देने का प्रयास किया जाएगा।
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]]>The post बियानी ग्रुप ऑफ कॉलेजेस का ‘गुलाबी’ बनेगा भारत-जापान सांस्कृतिक सहयोग का नया अध्याय appeared first on Biyani Times.
]]>जापानी विद्यार्थियों को राजस्थान की संस्कृति, पर्यटन, भारतीय जीवन मूल्यों और पारिवारिक परंपराओं से रूबरू कराएगा 12 दिवसीय कार्यक्रम
जयपुर। भारत और जापान के बीच शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को नई मजबूती देने के उद्देश्य से बियानी ग्रुप ऑफ कॉलेजेस द्वारा 12 से 24 सितम्बर 2026 तक अंतरराष्ट्रीय छात्र विनिमय कार्यक्रम ‘GULABI – Global Unity through Learning Art (Language & Culture) with BIYANI’ का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम बियानी ग्रुप ऑफ कॉलेजेस एवं रीको (RIICO) के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।
12 दिवसीय कार्यक्रम में जापान के यूजी एवं पीजी विद्यार्थी राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पर्यटन, भारतीय जीवन मूल्यों, होमस्टे और पारिवारिक संस्कृति का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त करेंगे।यह पहल भारत-जापान के बीच शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक सहभागिता के साथ-साथ राजस्थान की औद्योगिक, हस्तशिल्प एवं उद्यमशीलता की पहचान को अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों तक पहुंचाने का भी अवसर प्रदान करेगी।
कार्यक्रम के दौरान जापानी विद्यार्थियों को आमेर किला, हवामहल, सिटी पैलेस, जंतर-मंतर, पुष्कर, किशनगढ़ सहित राजस्थान के प्रमुख ऐतिहासिक एवं पर्यटन स्थलों का भ्रमण कराया जाएगा। इसके साथ ही भारतीय परिवारों के साथ होमस्टे, राजस्थानी लोककला, योग, ध्यान, भारतीय जीवनशैली, व्यक्तित्व विकास, पत्रकारिता, अंतरसांस्कृतिक संवाद (Cross-Cultural Communication) तथा पारंपरिक उद्योगों एवं हस्तशिल्प से जुड़े अनुभवात्मक सत्र आयोजित किए जाएंगे।
‘गुलाबी’ का उद्देश्य भारत और जापान के युवाओं के बीच सांस्कृतिक समझ, वैश्विक नागरिकता, नेतृत्व क्षमता और दीर्घकालिक सहयोग की भावना को मजबूत करना है। कार्यक्रम के माध्यम से जापानी विद्यार्थी राजस्थान को केवल एक पर्यटन स्थल के रूप में नहीं, बल्कि यहां की संस्कृति, परिवार, कला, परंपराओं और जीवनशैली के प्रत्यक्ष अनुभव के माध्यम से समझेंगे।
यह पहल राजस्थान की संस्कृति, कला, पर्यटन, हस्तशिल्प और भारतीय आतिथ्य परंपरा को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। साथ ही, कार्यक्रम भारत-जापान के युवाओं के बीच भविष्य के शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक सहयोग के लिए नए अवसर भी तैयार करेगा।
उल्लेखनीय है कि बियानी ग्रुप ऑफ कॉलेजेस पिछले दो दशकों से भारत-जापान शैक्षणिक सहयोग को निरंतर सुदृढ़ कर रहा है। संस्थान के 121 से अधिक विद्यार्थी जापान में उच्च शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं, जबकि 100 से अधिक विद्यार्थी जापान में आयोजित विभिन्न शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक एक्सचेंज कार्यक्रमों में भाग ले चुके हैं। इसके साथ ही, संस्थान के अनेक विद्यार्थियों को प्रतिष्ठित MEXT Scholarship भी प्राप्त हुई है।
इस अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम का समन्वयन एवं संचालन जापान से प्रो. मनीष बियानी एवं प्रो. हिरोहिसा तनाका तथा भारत से डॉ. राधिका बियानी डागा एवं डॉ. स्मृति तिवारी के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में किया जा रहा है।
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]]>The post स्व. श्री जुगल किशोर बियानी की 24वीं पुण्यतिथि पर विशाल रक्तदान शिविर आयोजित appeared first on Biyani Times.
]]>जयपुर, 2 सितम्बर। विद्याधर नगर स्थित बियानी ग्रुप ऑफ कॉलेजेस में समूह के प्रणेता स्वर्गीय जुगल किशोर बियानी की 24वीं पुण्यतिथि के अवसर पर विशाल रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) इकाई द्वारा आयोजित इस शिविर का आयोजन स्वास्थ्य कल्याण ब्लड बैंक एवं रोटरी क्लब के सहयोग से किया गया। शिविर में विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं स्टाफ सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए 82 यूनिट रक्तदान किया। इस अवसर पर एकत्रित रक्त का उपयोग जरूरतमंद मरीजों के उपचार में किया जाएगा।

कार्यक्रम का शुभारंभ चेयरमैन डॉ. राजीव बियानी, निदेशक डॉ. संजय बियानी, डीन एवं प्रिंसिपल डॉ. ध्यान सिंह गोठवाल तथा अन्य गणमान्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर एवं स्वर्गीय जुगल किशोर बियानी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए किया गया।
रक्तदान शिविर को सफल बनाने में स्वास्थ्य कल्याण ब्लड बैंक एवं रोटरी क्लब की टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इस अवसर पर एम. डी. भोजवानी, पी. एस. मोदी, श्रीकिशन शर्मा, ओलायिंका हकीम बाबालोला, अरुण बगारिया, आर. के. शर्मा, उजस चंद जैन एवं शिल्पा बेंद्रे के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य कल्याण ब्लड बैंक की टीम ने अपनी सेवाएं प्रदान कीं। टीम के डॉ. ओ. पी. गुप्ता, आकाश चौधरी, हरफूल, रमेश, मुकेश, प्रभा, भारती एवं रितिका ने रक्त संग्रहण एवं शिविर की व्यवस्थाओं में सक्रिय सहयोग दिया। इसी क्रम में एसएमएस हॉस्पिटल महिला चिकित्सालय की ओर से डॉ. अभिनव जी, शिव शंकर सोनी, मेराज चौधरी, कुल्फर सिंह एवं नोहर सिंह ने शिविर में सहयोग प्रदान किया।
इस अवसर पर बियानी नर्सिंग कॉलेज की प्राचार्य डॉ. जीशू जार्ज सहित विभिन्न विभागों के शिक्षक, विद्यार्थी एवं स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे। रक्तदान करने वाले प्रतिभागियों ने इस पहल को मानव सेवा का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए समाज में रक्तदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया।
रक्तदान शिविर का आयोजन स्व. श्री जुगल किशोर बियानी के सेवा, मानवता और समाज के प्रति समर्पण के आदर्शों को स्मरण करते हुए किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से सभी ने उनके सेवा भाव को आगे बढ़ाने तथा जरूरतमंदों की सहायता के लिए सदैव तत्पर रहने का संकल्प लिया।
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]]>The post बियानी गर्ल्स कॉलेज में प्लेनरी टॉक का आयोजन, वैज्ञानिक शोध और नवाचार पर हुआ विशेष संवाद appeared first on Biyani Times.
]]>जयपुर, 27 अप्रैल 2026: बियानी गर्ल्स कॉलेज में साइंस विभाग द्वारा सभी विद्यार्थियों के लिए एक “प्लेनरी टॉक” का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि प्रोफेसर राकेश त्यागी (मॉलिक्यूलर मेडिसिन में रिसर्चर एवं इनोवेशन विशेषज्ञ), प्रोफेसर पी.सी. माली (हेड ऑफ डिपार्टमेंट, जूलॉजी), आयोजक डायरेक्टर डॉ. संजय बियानी, डीन व प्रिंसिपल डॉ. ध्यान सिंह गोठवाल एवं डॉ. शिल्पा भार्गव द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया।

प्रोफेसर पी.सी. माली ने स्वागत भाषण में प्रो. राकेश त्यागी के 37 वर्षों के शोध अनुभव, 22 वर्षों के शिक्षण अनुभव, उनके प्रमुख रिसर्च कार्यों, पुरस्कारों व प्रकाशित शोध पत्रों का संक्षिप्त उल्लेख करते हुए उन्हें विज्ञान एवं शिक्षा क्षेत्र का प्रेरणादायक व्यक्तित्व बताया।
इसके पश्चात प्रोफेसर राकेश त्यागी ने महिला सशक्तिकरण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने ग्रीन फ्लोरोसेंट प्रोटीन (GFP) के इतिहास, उत्पत्ति एवं विकास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह आधुनिक जैविक शोध में एक क्रांतिकारी एवं आधारभूत उपकरण बन चुका है। साथ ही, जीएफपी से जुड़े महत्वपूर्ण शोध कार्यों एवं उसके व्यावहारिक उपयोगों की भी जानकारी दी।
कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने उनसे विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछे, जिनका उन्होंने सरल एवं प्रभावी ढंग से उत्तर दिया।
डीन व प्रिंसिपल डॉ. ध्यान सिंह गोठवाल ने विद्यार्थियों को निरंतर नई चीजें सीखने के लिए प्रेरित किया तथा नई तकनीकों को अपनाने के लिए विभिन्न उदाहरण प्रस्तुत किए।
यह सेशन अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक रहा, जिसने विद्यार्थियों को रिसर्च और साइंटिफिक इनोवेशन के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
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]]>The post दीक्षांत समारोह में बियानी कॉलेज की तीन छात्राओं को स्वर्ण पदक appeared first on Biyani Times.
]]>जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय के 35वें दीक्षांत समारोह में बियानी ग्रुप ऑफ कॉलेजेज की छात्राओं ने शानदार प्रदर्शन करते हुए मेरिट सूची में शीर्ष स्थान प्राप्त कर संस्थान का नाम गौरवान्वित किया।
इस गरिमामयी अवसर पर भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन, राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े तथा उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा की विशेष उपस्थिति रही।
बैचलर ऑफ बिज़नेस एडमिनिस्ट्रेशन (2021-24) की छात्रा कोमल स्वामी, बैचलर ऑफ कंप्यूटर एप्लिकेशन (2022-25) की छात्रा श्वेता कुमारी तथा बी. एड.-एम.एड. (2022-25) की छात्रा कविता पारीक ने अपने-अपने संकाय में प्रथम स्थान प्राप्त करते हुए गोल्ड मेडल और डिग्री हासिल की।
इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर संस्थान के चेयरमैन डॉ. राजीव बियानी, डायरेक्टर डॉ. संजय बियानी, प्राचार्य एवं डीन डॉ. ध्यान सिंह गोठवाल, बी.एड. कॉलेज प्राचार्या डॉ. शिप्रा गुप्ता, कॉमर्स विभागाध्यक्ष प्रियंका गुप्ता, आईटी विभागाध्यक्ष डॉ. सचिन बागोरिया तथा एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पवन पाटोदिया और राहुल अग्रवाल ने छात्राओं को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
उन्होंने कहा कि यह सफलता विद्यार्थियों की मेहनत, समर्पण और संस्थान की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का परिणाम है।
इस अवसर पर छात्राओं ने अपनी सफलता का श्रेय डॉ. संजय बियानी के मार्गदर्शन, शिक्षकों के सहयोग एवं परिवार के निरंतर समर्थन को दिया।
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]]>The post Yoga & Naturopathy: The Twin Pillars of a Cricketer’s Strength appeared first on Biyani Times.
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Yoga is not merely a physical exercise; it is a complete science of balance between body, mind, and soul. It aligns breathing, movement, and thought, helping a person to stay calm even in stressful situations. For athletes and cricketers, yoga serves as both a mental training tool and a physical conditioning method.
It builds flexibility, improves concentration, and brings inner peace — all of which are essential qualities for maintaining performance under pressure.
Modern cricket demands long hours of focus, quick decision-making, and emotional control — areas where yoga plays a vital role.
Enhances Concentration & Focus:
Techniques like Tratak (candle gazing) and Pranayama help players improve their concentration during long matches.
→ For example, bowlers like Ravichandran Ashwin use breathing techniques to stay focused before every delivery.
Improves Flexibility & Body Balance:
Asanas such as Surya Namaskar, Tadasana, and Vrikshasana increase muscle elasticity and prevent stiffness — reducing the risk of injuries.
→ This helps fielders make quick dives and maintain body balance while batting or bowling.
Boosts Emotional Control:
Meditation and deep breathing (Anulom-Vilom, Bhramari) help players stay calm even in high-pressure overs.
→ MS Dhoni’s legendary calmness under stress is often credited to his regular meditation and yogic discipline.
Enhances Endurance & Stamina:
Controlled breathing improves oxygen flow in the body, which boosts energy levels and stamina.
→ Long sessions of test cricket demand this kind of mental and physical endurance.
Promotes Quick Recovery:
Gentle yoga stretches and relaxation postures like Shavasana reduce muscle fatigue and improve recovery after intense matches or training sessions.
Develops Mental Strength:
Yoga trains the mind to stay centered. When the match situation gets tough, it helps players respond with clarity rather than panic.
→ Virat Kohli and many fitness-oriented cricketers practice mindfulness to maintain composure and consistency.
Beyond fitness, yoga is a form of mental conditioning. It sharpens awareness and emotional intelligence — two qualities every cricketer needs.
When a player practices deep breathing, meditation, and mindfulness, they not only enhance their physical performance but also gain the mental clarity required to make wise decisions during critical overs.
In this way, yoga becomes a game-changer, connecting physical agility with emotional stability. It transforms an ordinary player into a mindful athlete who performs with focus, grace, and confidence.

While yoga empowers the mind, naturopathy heals the body — both working together as two sides of holistic health.
Naturopathy is based on a simple yet powerful belief: “Nature itself is the best physician.”
Instead of relying on synthetic medicines, it encourages the body’s natural healing power (vital force) through clean food, rest, water, sunlight, and natural therapies.
For sportspersons, especially cricketers who experience fatigue, muscle strain, and stress, naturopathy offers safe and sustainable recovery methods without harmful side effects.
Healing Power of Nature:
Naturopathy trusts the body’s natural ability to heal when given proper care.
→ For example, a cricketer’s muscle injury can recover faster through herbal oils, heat therapy, and rest rather than heavy painkillers.
Prevention is Better than Cure:
It focuses on preventing illness by maintaining healthy habits — balanced diet, pure air, sunlight, and exercise.
→ Regular detoxification and herbal diets keep a player’s stamina consistent across long tournaments.
Holistic Treatment:
Naturopathy doesn’t treat just the symptoms but the root cause of illness — whether it’s stress, poor nutrition, or lack of rest.
→ This makes athletes not just fit but truly healthy from within.
Individualized Approach:
Every person’s body reacts differently. Naturopathy creates personalized diets and treatments based on individual needs and body types (prakriti).
Natural Diet Therapy:
Focuses on fresh fruits, vegetables, sprouts, juices, and herbal drinks.
→ Foods rich in antioxidants and vitamins speed up recovery after matches.
Herbal & Ayurvedic Remedies:
Using traditional herbs like ashwagandha for stamina, giloy for immunity, and turmeric for inflammation control.
→ Turmeric milk (haldi doodh) and tulsi water are common immunity boosters in players’ diets.
Hydrotherapy (Water Therapy):
Cold and warm water treatments relieve muscle soreness and joint pain.
→ Ice baths are a modern adaptation of this ancient naturopathic method used by players post-match.
Mud Therapy & Sun Therapy:
Mud packs and exposure to sunlight help detoxify the skin, reduce inflammation, and provide Vitamin D — essential for bone strength.
Rest & Relaxation:
Adequate sleep and relaxation are considered natural medicines.
→ Proper rest after intense training prevents burnout and injury.
When yoga and naturopathy are combined, they form a holistic health system that strengthens both the inner (mental) and outer (physical) self.
Yoga calms the mind and enhances focus, while naturopathy nurtures the body through natural care.
This powerful combination builds:
Stamina to play longer innings,
Immunity to resist illness, and
Balance to handle stress and performance pressure.
Thus, yoga and naturopathy together help an athlete not only play better but live better

Recognizing the growing importance of natural health sciences and the need for a balanced, healthy lifestyle, Biyani Group of Colleges, Jaipur has launched a progressive and futuristic program —Bachelor in Naturopathy and Yogic Sciences (BNYS).
This course represents Biyani’s vision and mission to promote education that goes beyond textbooks — education that nurtures body, mind, and spirit together. It aims to create a new generation of health professionals who can blend traditional Indian wisdom with modern scientific understanding to lead the world toward a healthier tomorrow.
The BNYS program provides comprehensive training in therapeutic yoga, diet and nutrition therapy, hydrotherapy, mud therapy, herbal medicine, human anatomy, and preventive healthcare. Students also receive hands-on experience through internships, workshops, and community wellness programs — preparing them to work effectively in hospitals, wellness centers, and fitness institutions.
In today’s fast-paced world, where stress and lifestyle diseases are increasing, the demand for natural and preventive healthcare professionals is rising rapidly. The BNYS course is, therefore, not just an academic program — it’s a career of compassion and opportunity.
Graduates can build successful careers as:
Yoga and Naturopathy Therapists
Wellness Consultants and Health Educators
Diet and Lifestyle Coaches
Or even entrepreneurs by establishing their own natural healing and yoga centers.
With global recognition of yoga and naturopathy, BNYS opens doors to international career opportunities while serving humanity through natural healing. It empowers students to contribute to India’s vision of becoming a global wellness hub.
As cricket inspires fitness and yoga encourages balance, such educational initiatives ensure that India’s youth remain fit, focused, and fearless.
When sports and natural wellness go hand in hand, India not only wins matches but also moves closer to building a healthier, stronger, and more conscious nation.
Dr. Sampat Singh (Principal)
Biyani Ayurveda and Naturopathy Medical College
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]]>The post बियानी ग्रुप ऑफ कॉलेजेस में “चाणक्य” फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का सफल समापन appeared first on Biyani Times.
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कार्यक्रम का शुभारंभ कॉलेज के मुख्य वक्ता डॉ. सतीश हांडा, निदेशक एवं प्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर डॉ. संजय बियानी, डीन व प्रिंसिपल डॉ. ध्यान सिंह गोठवाल, कॉमर्स एंड मैनेजमेंट विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. शिखा दुग्गड़ तथा सभी नवनियुक्त शिक्षकों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।

डायरेक्टर डॉ. संजय बियानी ने कहा कि जब तक जीवन में स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित नहीं होता, तब तक उसकी दिशा तय नहीं हो पाती। लक्ष्य ही व्यक्ति को श्रेष्ठता की ओर प्रेरित करता है। उन्होंने सलाह दी कि हमें दूसरों से तुलना करने के बजाय अपने कार्य को ईमानदारी और समर्पण के साथ करना चाहिए।
उन्होंने पॉजिटिविटी को कम्युनिकेशन के साथ जोड़ते हुए कहा कि आप अपने सहकर्मीयो की सराहना करें। और विद्यार्थियों के बीच एक दूसरे की गुडविल बनाएं।
साथ ही उन्होंने कहा कि हर ज़िम्मेदारी को पूरी निष्ठा से निभाना चाहिए, क्योंकि ऐसी आदतें ही व्यक्ति की पर्सनालिटी और कम्युनिकेशन स्किल्स को प्रभावशाली बनाती हैं।

वही डॉ.सतीश हांडा ने बॉडी लैंग्वेज और वॉयस मॉड्यूलेशन विषय पर सभी को संबोधित करते हुए कई मुहावरे, गाने और दमशराज जैसी इंटरैक्टिव गतिविधियों के माध्यम से सेशन को रोचक और सहभागिता पूर्ण बनाया। उन्होंने प्रतिभागियों को बॉडी लैंग्वेज को बेहतर ढंग से समझाने के लिए मुहावरों को हावभाव के साथ प्रस्तुत करने का अभ्यास कराया। साथ ही, दमशराज और बैलेंसिंग जैसी गतिविधियों के माध्यम से यह सिखाया गया कि कैसे अपनी बॉडी लैंग्वेज को प्रभावी और नियंत्रित ढंग से उपयोग किया जाए।
अंत में उन्होंने यह संदेश दिया कि आत्म-प्रशंसा आत्मविश्वास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। साथ ही, उन्होंने सुझाव दिया कि कक्षा में प्रभावी संवाद के लिए विद्यार्थियों से आँखों का संपर्क बनाए रखें और घड़ी या अन्य दिशा में न देखें। एक शिक्षक को हमेशा तैयारी के साथ आत्मविश्वासपूर्ण ढंग से कक्षा में उपस्थित होना चाहिए।
वहीं भूपेंद्र खन्ना ने मार्केटिंग स्किल्स की महत्ता बताते हुए इन्हें विकसित करने के व्यावहारिक तरीकों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ये कौशल न केवल ब्रांड प्रमोशन, बल्कि व्यक्तिगत और पेशेवर विकास के लिए भी बेहद जरूरी हैं।
देवेंद्र सोनी ने NAAC मानकों के अनुरूप कोर्स फ़ाइल तैयार करने पर मार्गदर्शन दिया। उन्होंने बताया कि इसमें पाठ्यक्रम की रूपरेखा, पाठ योजना, मूल्यांकन प्रक्रिया और गुणवत्ता संवर्धन गतिविधियों का स्पष्ट दस्तावेजीकरण आवश्यक है।
यह कार्यक्रम शिक्षकों के विकास की दिशा में एक सार्थक और प्रेरणादायक पहल रहा।
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]]>The post 19 वां कल्पना चावला मेमोरियल अवॉर्ड समारोह भव्य रूप से हुआ आयोजित appeared first on Biyani Times.
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कार्यक्रम में आयोजक डायरेक्टर डॉ. संजय बियानी, डीन व प्रिंसिपल डॉ. ध्यान सिंह गोठवाल, बी. एड प्रिंसिपल डॉ. एकता पारीक, आइक्यूएसी हैड डॉ. अपर्णा दीक्षित, सम्यक ब्रांच मैनेजर तस्लीम खान ने दीप प्रज्वलित कर किया।

डॉ. संजय बियानी ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान नहीं, बल्कि सकारात्मक व्यक्तित्व निर्माण होना चाहिए। सच्ची शिक्षा वही है जो विकास करे और चेहरे पर मुस्कुराहट लाए।
डॉ. बियानी ने कहा कि गणेश जी के बड़े कान हमें केवल सुनना ही नहीं, बल्कि समझदारी और एकाग्रता से सुनना सिखाते हैं। उनका एक हाथ कर्म के लिए प्रेरित करता है। दूसरे हाथ में रखा मोदक फल की प्राप्ति का प्रतीक है। इसलिए हमें ध्यान से सुनना और कर्म करना आना चाहिए, जिससे हमें फल की प्राप्ति हो।
कल्पना चावला का उदाहरण देते हुए उन्होंने लक्ष्य निर्धारण और काउंसलिंग की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे बच्चों को उनकी रुचि के अनुसार करियर चुनने दें। उन्होंने सकारात्मक माहौल और कृतज्ञता को सफलता की कुंजी बताया। साथ ही उन्होंने सपनों को साकार करने के चार स्टेप साझा किए: ड्रीम, बिलीव, विज़ुअलाइज़ और एक्शन।
वहीं आइक्यूएसी हैड अपर्णा दीक्षित ने सभी कोर्सेज की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपने इंटरेस्ट के अनुसार जीवन की दिशा तय करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से मजबूत होना ज़रूरी है। कल्पना चावला का उदाहरण देते हुए उन्होंने जर्नी को अधिक महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने बताया कि बियानी में यह अवॉर्ड 19 वर्षों से दिया जा रहा है। साथ ही विद्यार्थियों से संगठन से जुड़ने का आग्रह किया।
सम्यक ब्रांच मैनेजर तस्लीम खान ने सभी विषयों के विद्यार्थियों को आईएएस, आरएएस जैसी परीक्षाओं के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि बियानी के साथ सम्यक में पढ़ाई से समय की बचत होती है, क्योंकि छात्र एक साथ कॉलेज शिक्षा और सरकारी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सकते हैं।
सभी के मोटिवेशनल स्पीच के बाद सभी कक्षा 12वीं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को मेडल एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर देकर सम्मानित किया गया।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डीन एवं प्रिंसिपल डॉ. ध्यान सिंह गोठवाल ने सभी को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की शुभकामनाएं दीं। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि “योग हमारे जीवन का अभिन्न अंग है। यह न केवल हमें शारीरिक रूप से स्वस्थ रखता है, बल्कि मानसिक रूप से भी सशक्त बनाता है।” उन्होंने सभी को स्वस्थ जीवन के लिए योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करने और नियमित अभ्यास करने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को योग के प्रति जागरूक करना और उसे जीवनशैली का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित करना रहा।
कार्यक्रम का सफल संचालन कॉर्डिनेटर संपत सिंह ने किया।
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कार्यशाला के पहले दिन सत्र में कॉलेज के निदेशक डॉ. संजय बियानी ने अपने प्रेरणादायक संबोधन में विद्यार्थियों को सफलता प्राप्त करने के लिए जोखिम उठाने के महत्व को बताया । उन्होंने विद्यार्थियों को आत्मविश्वास बढ़ाने और मंच पर सहजता लाने के लिए विभिन्न गतिविधियों करवाई , जिससे उनका स्टेज फियर दूर हो सके।
डॉ. बियानी ने ‘गुरु’ और ‘मैरीकॉम’ जैसी फिल्मों के उदाहरणों के माध्यम से विद्यार्थियों को स्टार्टअप और आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर होने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा, “आज का युवा केवल नौकरी लेने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बन सकता है, यदि वह अपनी क्षमताओं को पहचानकर उन्हें सही दिशा में विकसित करे।”

यह कार्यशाला आगामी दस दिनों तक डॉ. संजय बियानी के नेतृत्व में आयोजित की जाएगी, जिसमें विभिन्न प्रैक्टिकल गतिविधियों और मार्गदर्शन सत्रों के माध्यम से विद्यार्थियों को उद्यमिता से जुड़े व्यावसायिक कौशल और चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार किया जाएगा।
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