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शिक्षा, विद्या व ज्ञान शब्द को ठीक से समझना होगा

हाल ही में बीबीए में अध्ययनरत जोधपुर के छात्र द्वारा हॉस्टल में आत्महत्या किए जाने का प्रकरण चर्चा का विषय रहा। परंतु इस तरह के प्रकरण हर माह घटते हुए देखे जा सकते हैं। यह तो तनाव का सबसे ऊंचा स्तर है। हम निश्चित रूप से कह सकते हैं कि मॉर्डन एजुकेशन सिस्टम ने लगभग हर बच्चे में तनाव भर दिया है। आईए, जरा विचार करें कि क्यों शिक्षा में तनाव इस कदर बढ़ गया है। इसे ठीक से समझने के लिए शिक्षा, विद्या व ज्ञान शब्द को ठीक से समझना होगा। अंग्रेजी, हिन्दी, भौतिकी, वाणिज्य, इतिहास आदि विषयों का अध्ययन शिक्षा कहलाता है। शिक्षा में हम बाहरी दुनिया से संबंधित जानकारियां प्राप्त करते हैं, पर इन जानकारियों के आधार पर निर्णय लेने की प्रक्रिया को विद्या कहा जा सकता है। उच्च शिक्षा में हम बाहरी जानकारियों के आधार पर निर्णय लेना सीखते हैं, सही और गलत फैसले लेना सीखते हैं। इस तरह से अगर वर्तमान शिक्षा पद्धति को देखें तो इसकी पूरी परिभाषा में बाहरी दुनिया की जानकारी जुटाना व बाहरी दुनिया के बारे में फैसला लेना ही शामिल है पर इन दोनों से महत्वपूर्ण शब्द है – ज्ञान। ज्ञान के बोध से मनुष्य को स्वयं को जानने का मौका मिलता है, उसे अपनी महत्ता समझ आती है। उसमें जीवन मूल्यों का विकास होता है जो कि व्यावहारिक जीवन में अच्छे स्वास्थ्य, अच्छे संबंध, शुभ धन, अच्छे कॅरियर के लिए सबसे अधिक आवश्यक है। आज स्टूडेन्ट्स की शिक्षा व विद्या के लिए अभिभावक काफी धन व समय खर्च करते हैं पर जीवन मूल्य के विकास पर ना तो स्वयं ध्यान देते हैं और ना ही विद्यालय व महाविद्यालय स्तर पर ध्यान दिया जा रहा है। ज्ञान के अभाव में पाश्चात्य देशों में काफी समय पूर्व प्रचलित तनाव रूपी बीमारी आज हमारे देश में घर-घर देखी जा सकती है। आधुनिक जीवन परिवेश में आज हम हमारी मूलभूत समझ से दूर हो गए हैं। शायद ही कोई शिक्षक या अभिभावक स्टूडेन्ट्स के साथ बैठकर आसन, प्राणायाम, ध्यान व जीवन मूल्यों की बातें कर रहे हैं। ऐसी परिस्थिति में एक ऐसे समाज की रचना करते जा रहे हैं जहां सुख व साधन तो होंगे परन्तु घर जीवन में प्रसन्नता, खुशी, संबंध व स्वास्थ्य सीमित हो चुके होंगे। हां, अंत में एक बात और कहना चाहेंगे कि हर युवा विशिष्ट योग्यता रखता है, इसी योग्यता के अनुरूप उन्हें कॅरियर का चुनाव करना चाहिए ताकि उनकी एकाग्रता व ऊर्जा का सही दिशा में उपयोग किया जा सके। वैज्ञानिक भाषा में कहें तो हम सभी ऊर्जा के रूप हैं, हमारे शरीर में असंख्य कोशिकाएं हैं, इन कोशिकाओं का संचालन बुद्धि से भी अधिक भाव / इमोशन द्वारा होता है। आईए, इस नवरात्रा पर भाव शुद्धि के लिए मां से प्रार्थना करें। नवरात्रि के इस शुभ अवसर पर पाठकों को मैं अपनी शुभकामनाएं प्रेषित करता हूं।
प्रेम, स्नेह व सम्मान के साथ….

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