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आँख है तो जहां है: मनोज शर्मा (प्रसिद्ध आई केयर विशेषज्ञ)

1. नेत्र रोग कैसे फैलते हंै?
आँख कैमरे की तरह होती है। जिस प्रकार कैमरे में लैंस होते हंै उसी प्रकार आँखों में भी लैंस होते हैं। आजकल युवावस्था में ही आँखों का लैंस कमजोर हो जाता है व बड़ी उम्र में मोतियाबिंद की शिकायत हो जाती है। बचपन में चोट लगने से व गलत दवाईयों से मोतियाबिंद हो सकता है।
2. लेजर टेक्नोलोजी व फेको सर्जरी क्या है?
यदि आँखों की रोशनी कमजोर है या चश्मे का बड़ा नम्बर है तो लेजर टेक्निक से रोशनी आ सकती है व चश्मे का नम्बर उतर सकता है। लेकिन उस सर्जरी के लिए पहले मरीज मेडिकल रूप से फिट होना चाहिए। लेजरिंग 20 से 40 की उम्र में करवानी चाहिए व 35 से 40 की उम्र तक ही फायदा पहुंचाती है।
3. आँखों का चैक-अप पहली बार कब करवाना चाहिए?
जब बच्चे साढे तीन से चार साल तक की उम्र में हों, तब आँखों की जांच करवानी चाहिए। जब आँख संबंधी समस्या होने लगे तो डॉक्टर को अवश्य दिखाना चाहिए। बी. पी. व शुगर के मरीजों को हर छ: महिने में डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
4. जो लोग कम्प्यूटर व ए.सी.में काम करते हैं उन्हें अपनी आँखों संबंधी क्या-क्या सावधानियां रखनी चाहिए?
ए.सी. चैम्बर में काम करने वालों को प्रत्येक आधे घण्टे बाद साफ पानी से आँखें धोनी चाहिए। ए.सी. हमारी आँखों से सारा मोईस्चर सोख लेता है। कम्प्यूटर यूज करने वालों को 20-20-20 का नियम अपनाना चाहिए। प्रत्येक 20 मिनट में 20 मीटर दूर देखें व 20 बार आँखें झपकाएं। कम्प्यूटर टेबल की सैटिंग 900 पर होनी चाहिए। कम्प्यूटर स्क्रीन से चेयर 26 इंच दूर होनी चाहिए। रूम की लाइट समानांतर होनी चाहिए।
5. आँखों के प्रति हमें क्या सावधानियां रखनी चाहिए?
हमें मौसम के अनुसार फल व सब्जियां खानी चाहिए। हरी पत्तेदार सब्जियां, प्रोटीन युक्त भोजन खाना चाहिए। धूप में जाने पर अल्ट्रा-वायलेट प्रोटेक्टर ग्लास वाले गॉगल्स लगाने चाहिए। जब भी ड्राइविंग या राइडिंग करते हैं तो चश्मा लगाना चाहिए व हर छ: महिने बाद चैक-अप करवाना चाहिए। आई-ड्रॉप डाक्टर की सलाह पर ही लेनी चाहिए।
6. बियानी टाइम्स के पाठकों को आप आंखों संबंधी क्या सलाह देना चाहेंगे?
देखिए, हमें अपनी व अपने परिवार वालों की आँखों के प्रति हमेशा सजग रहना चाहिए। मेरी मुख्य सलाह है कि आप सभी को नेत्र-दान जरूर करना चाहिए। दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करना चाहिए। किसी भी उम्र के व्यक्ति की मृत्यु हो जाए तो छ: घण्टे तक आप अपने नजदीकी अस्पताल के आई-बैंक में कॉल करें। इसके लिए आई-डोनशन फार्म भरा जाता है।

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