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राजनेता सीखें पॉलिटिकल मैनेजमेंट…

शायद ही भारत की राजनीति में ऐसा कोई होगा जो अटल जी की आलोचना कर सके । पक्ष-विपक्ष की भावना से ऊपर उठकर वो सभी को अपना मानकर प्रेम करते थे। वे सभी को भारत के विकास में सहयोगी बनाना चाहते थे। कार्यकर्ताओं से वो ऐसे खुलकर प्रेम से गले लगा करते थे जैसे वो उनके ही अपने भाई बंधु हों। अपने पराये का भाव अटल जी को कभी छूकर भी नहीं गया ।

आज भारतीय राजनीति के युग पुरुष पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी हमारे बीच नहीं रहे । 93 साल की उम्र में वे अपने पीछे राजनैतिक आदर्शों की एक ऐसी विरासत छोड़ गए हैं जो आने वाली सदियों में स्वस्थ राजनीति की परिभाषा के तौर पर जानी जायेगी।

अटल जी ने अपने जीवन में संगठन और शासन को कुशलता पूर्वक संभाला, बात चाहे एनडीए के गठबंधन में साथ आए घटक दलों को संभालने की हो या विपक्ष को संभालने की, अटल जी के व्यक्तित्व से हर कोई प्रभावित रहता था और हर कोई उनकी बात मानता था। अटल जी का जीवन आज के राजनेताओं के लिए एक ऐसा संदेश है जिसे अपनाकर भारत एक स्वस्थ राजनीति की तरफ अग्रसर हो सकता है । विकास,  देशप्रेम, आपसी सौहार्द और प्रेम को प्राथमिकता देकर उन्होने सबको एक परिवार का हिस्सा मानकर काम किया। उनके प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए उनकी नजर में पक्ष-विपक्ष के नाम पर कोई भेदभाव नहीं था।

आइये हम भी अटल जी के जीवन से प्रबंधन के कुछ महत्वपूर्ण गुण सीखें –

1. निस्वार्थ सेवा – अटल जी जीवन भर सिर्फ देशवासियों की सेवा करने का मौका ढूंढा करते थे । कभी भी कहीं भी अगर उन्हें लगता था की सेवा का मौका मिल रहा है तो वो उसे चूकते नहीं थे। निस्वार्थ भाव से वो हमेशा देश के लिए कार्यरत रहे, तीन बार भारत के प्रधानमंत्री रहने के बावजूद भी कभी उन्होने अपने लिए खुद का एक घर भी नहीं बनवाया, कभी अपने स्वार्थ के बारे में तो उनके भीतर लेश मात्र भी विचार नहीं आया। आज भारत को ऐसे ही त्यागी, तपस्वी और योगी व्यक्तित्व के राजनेताओं की आवश्यकता है जो निस्वार्थ भाव से देश को कुछ दे सकें।

2.निर्विवाद रहना – अटल जी कहा करते थे मुझे मृत्यु से डर नहीं लगता पर बदनामी से डर लगता है। यही कारण रहा की वे हमेशा सही का साथ दिया करते थे और कभी विवादों में नहीं आते थे। अटल जी हमेशा अपनी वाणी और कार्यों को मर्यादा की डोर से बांधकर रखते थे, ताकि कभी कोई विवाद उनको छू भी ना पाये। उनके राजनैतिक विरोध के भाषण भी मर्यादित भाषा में दिये जाते थे। जिसे विपक्ष भी ध्यान से सुनता था। आज राजनेताओं को यह सीखना चाहिये की आप जब बोलते हैं तो दुनिया आपको देखती है और आपकी शालीन भाषा शैली से आपका ही व्यक्तित्व प्रभावशाली बनता है।

3. दृढ़ निर्णय लेने की क्षमता-चाहे पोखरण में परमाणु परीक्षण करने का निर्णय हो या कारगिल युद्ध जैसा संकट का समय हो या फिर कंधार विमान हाइजैक में निर्दोषों को बचाने की बात हो हर जगह अटल जी ने अपनी अटल निर्णय क्षमता का परिचय दिया। वो एक बार निश्चय कर लेते थे फिर उसे पूरा करके ही रहते थे, चाहे पूरी दुनिया भारत पर दबाव बनाने की कोशिश करे लेकिन वो कभी अपने निश्चय से पीछे नहीं हटते थे।

4. प्रेम और करुणा – शायद ही भारत की राजनीति में ऐसा कोई होगा जो अटल जी की  आलोचना कर सके । पक्ष-विपक्ष की भावना से ऊपर उठकर वो सभी को अपना मानकर प्रेम करते थे। वे सभी को भारत के विकास में सहयोगी बनाना चाहते थे। कार्यकर्ताओं को वे ऐसे खुलकर प्रेम से गले लगाते थे जैसे वो उनके अपने ही भाई बंधु हैं। अपना पराया का भाव अटल जी को कभी छूकर भी नहीं गया ।

5. विरोधियों को भी साथ लेकर चलने की कला – अटल जी का यह मानना था की कोई भी निर्णय आम सहमति से लिया जाना चाहिये। इसके लिए विरोधियों की बात सुन कर उन्हें भी निर्णय में शामिल किया जाना चाहिये। पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी लिखते हैं की उनके द्वारा लाया गया भारतीय पेटेंट एक्ट में संशोधन 1995 में राज्यसभा में पास नहीं हो पाया था तो इस पेटेंट कानून संशोधन को 2003 में वाजपेयी जी दोबारा लेकर आए और डॉ0 मनमोहन सिंह और मुझसे चर्चा की, जिसके बाद कांग्रेस संसदीय दल की बैठक में मैंने खुद 2 घंटे तक सबको यह समझाया की यह संशोधन पारित होना देश के लिये क्यों जरूरी है। यह घटना अटल जी की सबको साथ लेकर चलने वाली नेतृत्व क्षमता का सजीव उदाहरण है।

6. आधुनिक विज्ञान का सदुपयोग -1998 में पोखरण में सफल परमाणु परीक्षण करने के बाद अटल जी ने पूर्व प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री जी के नारे ‘जय जवान-जय किसान’ के साथ ‘जय विज्ञान’ को जोड़ कर एक नया नारा दिया। जिसका संदेश था की आज के वैज्ञानिक युग में भारत विज्ञान के क्षेत्र में किसी से पीछे नहीं रहेगा और उत्तरोत्तर प्रगति करेगा। इसी कड़ी में 15 अगस्त 2003 को अटल जी ने देश के पहले ‘चन्द्रयान-१’ की घोषणा की जिसे 22 अक्टूबर 2008 को लॉन्च किया गया। इस यान ने चांद पर पानी खोजा, जो इसरो की सबसे बड़ी सफलता मानी गई।

आज अटल जी स्थूल शरीर से भले ही हमारे बीच नहीं हैं, परंतु भारत रत्न अटल जी का व्यक्तित्व सदैव ध्रुव तारे की तरह देश की राजनीति को दिशा देता रहेगा। ऐसे अटल व्यक्तित्व को हम सभी का भाव भरा नमन और श्रद्धांजली।

 

 

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